
आजकल कई युवा अच्छी नौकरी और ज्यादा सैलरी पाने के लिए विदेश जाने का सपना देखते हैं. सोशल मीडिया और इंटरनेट पर उन्हें तरह-तरह के जॉब ऑफर दिखते हैं. जैसे फ्री वीजा, रहने का इंतजाम, शानदार पैकेज, डेटा एंट्री या कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी. लोग बिना ज्यादा जांच-पड़ताल के इन पर भरोसा कर लेते हैं, लेकिन कई बार यही सपना डरावनी हकीकत बन जाता है.
क्या है साइबर गुलामी?
साइबर गुलामी का मतलब है किसी को धोखे से या दबाव में रखकर इंटरनेट पर अपराध करवाना. इसमें लोगों से ऑनलाइन ठगी, बैंक डिटेल्स चोरी, फर्जी निवेश स्कीम चलाना, लोन ऐप से ब्लैकमेल करना या अश्लील कंटेंट बनवाना शामिल है. इन कामों से मना करने पर पीड़ित को पीटा जाता है, खाना नहीं दिया जाता या परिवार को धमकाया जाता है.
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इसमें सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर फर्जी जॉब ऑफर भेजे जाते हैं. एजेंट और ट्रैवल कंपनियां फर्जी वीजा और टिकट बनाकर युवाओं को पहले दुबई, थाईलैंड या सिंगापुर भेजते हैं. वहां से उन्हें म्यांमार, कंबोडिया या वियतनाम ले जाकर पासपोर्ट छीन लिया जाता है. फिर उन्हें दिन में 12–14 घंटे साइबर क्राइम करने पर मजबूर किया जाता है, जैसे OTP और बैंक डिटेल्स लेना, नकली वेबसाइट बनाना, विदेशी नागरिकों को क्रिप्टो में फंसाना.
कितने भारतीय फंसे हैं?
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2022 से मई 2024 के बीच 73,000 से ज्यादा भारतीय टूरिस्ट वीजा पर इन देशों में गए. इनमें से करीब 29,466 लोग वापस नहीं लौटे. इनमें 70% से ज्यादा पुरुष हैं, जिनकी उम्र 20–40 साल के बीच है. सबसे ज्यादा केस केरल, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं. सिर्फ यूपी के ही करीब 2,000 युवा अभी भी फंसे हुए हैं.
कैसे बचें इस जाल से?
1. सोशल मीडिया पर मिली अनजान नौकरी पर भरोसा न करें.
2. विदेश जाने से पहले कंपनी और वीजा की पूरी जांच करें.
3. केवल सरकार से मान्यता प्राप्त एजेंट या ट्रैवल एजेंसी के जरिए जाएं.
4. अपनी विदेश यात्रा की जानकारी परिवार और दोस्तों को दें.
5. किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत शिकायत करें –
साइबर हेल्पलाइन: 1930
विक्टिम हेल्प नंबर: 9256001930
साइबर क्राइम पोर्टल: https://cybercrime.gov.in