राज्यसभा में एक प्रश्न के दौरान सरकार ने वह आंकड़ा जारी किया, जिसे जानकर कई लोग हैरान रह गए। विदेश मंत्रालय ने बताया कि पिछले 14 वर्षों में लाखों भारतीयों ने देश की नागरिकता छोड़ी है, हालांकि पिछले दो साल में इस प्रवृत्ति में गिरावट आई है। 2024 में 2.06 लाख लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी, जो पिछले तीन सालों की तुलना में सबसे कम है। सरकार का कहना है कि नागरिकता छोड़ने की दर 2022 के बाद लगातार कम हो रही है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
पिछले पांच साल का पूरा ट्रेंड
विदेश राज्य मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में बताया कि 2020 से अब तक कितने लोग भारतीय नागरिकता छोड़कर दूसरे देशों के नागरिक बने। 2020 में 85,256 लोगों ने नागरिकता छोड़ी, 2021 में यह संख्या बढ़कर 1,63,370 हो गई। 2022 में यह आंकड़ा 2,25,620 तक पहुंच गया, जो सबसे अधिक था। लेकिन इसके बाद 2023 में यह संख्या घटकर 2,16,219 और 2024 में 2,06,378 रह गई। यानी लगातार दो वर्षों से इस संख्या में कमी दर्ज हो रही है।
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2011 से 2019 तक का रिकॉर्ड क्या कहता है?
सरकार ने 2011 से 2019 तक के आंकड़े भी साझा किए, ताकि नागरिकता छोड़ने की प्रवृत्ति का लंबा विश्लेषण किया जा सके। 2011 में 1,22,819 भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी थी। 2014, जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने, उस साल यह संख्या 1,29,328 रही। इसके बाद 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,44,017 हो गया। हालांकि कोरोना महामारी के बाद से यह संख्या कई बार ऊपर-नीचे हुई, लेकिन पिछले दो वर्षों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
राजनीतिक बहस और बड़ा संकेत
पिछले साल जब नागरिकता छोड़ने के आंकड़े सामने आए थे तो विपक्ष ने इसे सरकार की नीतियों की विफलता बताया था। लेकिन अब सरकार राहत की सांस ले सकती है क्योंकि ताज़ा आंकड़ों में यह स्पष्ट है कि यह ट्रेंड नीचे जा रहा है। 2022 के मुकाबले 2023 में और 2023 के मुकाबले 2024 में नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या में गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आर्थिक माहौल, ग्लोबल अवसरों में बदलाव और भारत की बढ़ती संभावनाओं से जुड़ा हो सकता है।