दुनिया में लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र के समीकरण बदल दिए हैं। कई देश जहां युद्ध और अस्थिरता से जूझ रहे हैं, वहीं भारत ने इस हालात को अवसर में बदल लिया है। एक समय था जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। सरकार की नीतियों और घरेलू उत्पादन पर जोर ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया है और इसका असर अब वैश्विक स्तर पर दिख रहा है।
मेक इन इंडिया से बदली तस्वीर
मेक इन इंडिया नीति ने भारतीय रक्षा उद्योग को नई दिशा दी है। सरकार ने न केवल घरेलू कंपनियों को बढ़ावा दिया बल्कि विदेशी निर्भरता भी कम की। यही वजह है कि भारत का रक्षा बजट तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2014 में जो बजट 2.53 ट्रिलियन रुपये था, वह 2026 में बढ़कर 6.8 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया। इस निवेश ने तकनीक, उत्पादन और रोजगार तीनों को मजबूती दी है।
खरीदार से निर्यातक बना भारत
भारत की पहचान अब सिर्फ हथियार खरीदने वाले देश की नहीं रही। आंकड़े बताते हैं कि 2014 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ 6.9 अरब रुपये था, जो 2025 में बढ़कर 236.2 अरब रुपये तक पहुंच गया। आज भारत का गोला बारूद, रडार सिस्टम और हथियार प्लेटफॉर्म करीब 80 देशों में इस्तेमाल हो रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय तकनीक पर अंतरराष्ट्रीय भरोसा और मजबूत हुआ है।
रडार और इलेक्ट्रॉनिक्स में मजबूती
रक्षा क्षेत्र में भारतीय कंपनियों ने खास पहचान बनाई है। डेटा पैटर्न्स जैसी कंपनियां हाई एंड डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार सिस्टम में आगे हैं। इनका कारोबार अब ब्रिटेन, यूरोप और दक्षिण अमेरिका तक फैल चुका है। सितंबर 2025 तक कंपनी के पास सैकड़ों करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर थे, जो दिखाता है कि भारतीय तकनीक को वैश्विक बाजार में स्वीकार किया जा रहा है।
इसे भी पढ़ें : WPL के पहले ही मैच में रोमांच की सारी हदें पार, इस खिलाड़ी ने आखिरी गेंद पर पलटा मैच, मंधाना झूम उठीं !
स्पेस और सिस्टम इंटीग्रेशन की उड़ान
एस्ट्रा माइक्रोवेव जैसी कंपनियां अब सिर्फ छोटे पुर्जे नहीं बल्कि पूरे सिस्टम तैयार कर रही हैं। रक्षा के साथ साथ स्पेस सेक्टर में भी इनकी मजबूत पकड़ बन रही है। अमेरिका, इजराइल और सिंगापुर जैसे देशों से मिले ऑर्डर यह बताते हैं कि भारतीय कंपनियां अब उच्च तकनीक वाले बाजार में भी भरोसेमंद बन चुकी हैं।
ड्रोन युद्ध और नई जरूरतें
आधुनिक युद्धों में ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम की भूमिका तेजी से बढ़ी है। इसी जरूरत को देखते हुए जेन टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां ट्रेनिंग सिमुलेटर और एंटी ड्रोन सिस्टम विकसित कर रही हैं। अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और सीआईएस देशों में इनकी मांग बढ़ रही है। साफ है कि वैश्विक तनाव के इस दौर में भारत का रक्षा उद्योग न केवल मजबूत हुआ है बल्कि निवेशकों के लिए भी नई संभावनाएं खोल रहा है।