बांग्लादेश में एक बार फिर से तनाव का आलम हो गया है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार मुल्क में शासन करने के लिए नाकाम साबित हो रही है। उनकी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विरोध प्रदर्शन में सरकारी कर्मचारी भी शामिल हो चुके हैं। लेकिन मोहम्मद यूनुस अपनी नाकामियों का जिम्मेदार भारत को ठहराना चाहते हैं। मुल्क मे जो विरोध प्रदर्शन और आक्रोश लोगों में फैला है उसके लिए विदेशी साजिश को जिम्मेदार बता रहे हैं। मोहम्मद यूनुस को देश में सिर्फ चुनाव करवाने तक के लिए सरकार चलाने भर की जिम्मेदारी मिली है। लेकिन अब वह चुनाव छोड़कर बाकी हर तरह के हथकंडे अपनाने में लगे हैं। मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की विदेश नीति, संविधान,उसका इतिहास को बदलने की कोशिश की है। इसी कारण बांग्लादेशी फौज ने भी यूनुस के खिलाफ बगावत शुरु कर दी है। मोहम्मद यूनुस ने जब से बांग्लादेश की बागडोर संभाली है तब से भारत के चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों के साथ हाथ मिलाना शुरु कर दिया है। उन्हें चीन के दम पर भारत के जिस चिकन नेक कॉरिडोर (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को दबा पाने की जो गलती कर रहे हैं उन्हें शायद इसका अंदाजा नहीं है कि भारत उनके साथ क्या कर सकता है।
बुराई को खत्म करने के लिए शक्ति की जरूरत मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के एक हालिया इंटरव्यू को देखें तो नागपुर से भी मोदी सरकार को उसी तरफ इशारा किया गया है। संघ के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर और पांचजन्य में रविवार को छपे उनके एक इंटरव्यू के मुताबिक उन्होंने भारत के पड़ोस में 'बुराई को खत्म' करने के लिए शक्ति का इस्तेमाल करने की बात कही है। उनके अनुसार कुछ देशों में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है। ऐसे में हिंदू समाज की ताकत का इस्तेमाल उनकी रक्षा के लिए किया जाना चाहिए। दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर अपने विचार रखते हुए संघ के सर संघचालक ने कहा, 'हमारी ताकत अच्छे लोगों की रक्षा और बुरे लोगों को नष्ट करने के लिए होनी चाहिए। जब कोई और चारा नहीं होता, तो बुराई को जबरदस्ती खत्म करना पड़ता है। इसलिए, हमारे पास शक्तिशाली बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि हम अपनी सीमाओं पर बुरी ताकतों की बुराई देख रहे हैं।
चिकन नेक को लेकर सीएम हिमंत सरमा ने जताई आशंका
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ए पोस्ट डालते हुए लिखा है कि 'जिन्हें भारत को चिकन नेक कॉरिडोर पर धमकाने की आदत पड़ चुकी है।उन्हें तीन तथ्यों को ध्यान से नोट कर लेना चाहिए।पहला, बांग्लादेश के पास अपने दो 'चिकन नेक' हैं। दोनों कहीं ज्यादा असुरक्षित हैं।दूसरा, पहला है 80 किमी लंबा उत्तर बांग्लादेश कॉरिडोर। यह दक्षिण दिनाजपुर से दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स (मेघालय) तक जाता है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो पूरा रंगपुर डिवीजन बांग्लादेश से कट सकता है। मतलब, रंगपुर का बाकी बांग्लादेश से संपर्क टूट जाएगा।तीसरा,यह है 28 किमी का चटगांव कॉरिडोर। यह साउथ त्रिपुरा से बंगाल की खाड़ी तक जाता है। यह कॉरिडोर भारत के 'चिकन नेक' से भी छोटा है। पर यह बांग्लादेश की आर्थिक राजधानी और राजनीतिक राजधानी को जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता है।