UN Security Council Membership Begins: भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए गैर-स्थायी सदस्यता हासिल करने की दिशा में अपना औपचारिक अभियान शुरू करने जा रहा है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में #India4UNSC 2028-29: Peace, Planet, Progress अभियान की शुरुआत करेंगे। इस दौरान उनकी संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात प्रस्तावित है। भारत इस अभियान के जरिए खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति और ग्लोबल साउथ की प्रभावशाली आवाज के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करेगा।
2027 के चुनाव में ताजिकिस्तान से होगा मुकाबला
संयुक्त राष्ट्र महासभा में वर्ष 2027 में होने वाले चुनाव में भारत एशिया-प्रशांत समूह की एक गैर-स्थायी सीट के लिए ताजिकिस्तान के साथ मुकाबला करेगा। यदि भारत इस चुनाव में सफल रहता है तो वह 2028-29 के कार्यकाल के लिए नौवीं बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य बनेगा। इससे पहले भारत आठ बार इस महत्वपूर्ण वैश्विक संस्था का निर्वाचित सदस्य रह चुका है और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
पहले भी मिला है व्यापक वैश्विक समर्थन
भारत 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22 में सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य रह चुका है। वर्ष 2010 के चुनाव में भारत को 192 में से 187 देशों का समर्थन मिला था, जिसे हाल के वर्षों में किसी भी उम्मीदवार के लिए सबसे मजबूत जनसमर्थनों में गिना जाता है। भारत का मानना है कि उसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था, शांति अभियानों में योगदान और वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका उसे इस जिम्मेदारी के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।
सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को मिलेगी नई धार
भारत का यह अभियान केवल गैर-स्थायी सदस्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग को भी मजबूती देने का प्रयास है। भारत लगातार कहता रहा है कि वर्ष 1945 में बनी सुरक्षा परिषद आज की वैश्विक परिस्थितियों और विकासशील देशों की वास्तविक भागीदारी को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल ही में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं।
वैश्विक भूमिका मजबूत करने की रणनीति
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह अभियान उसकी दीर्घकालिक विदेश नीति का अहम हिस्सा है। एक ओर भारत 2028-29 के लिए गैर-स्थायी सदस्यता हासिल करने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता और संस्थागत सुधार के अपने एजेंडे को भी अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाना चाहता है। रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और पश्चिम एशिया के तनाव जैसे वैश्विक संकटों के बीच भारत खुद को संवाद, शांति और सहयोग का समर्थक देश के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार सक्रिय है।