Middle East crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीति से एक अनोखी मिसाल पेश की है। हालात ऐसे बने कि एक-दूसरे के विरोधी देश भी भारत की मदद के लिए आगे आए। अज़रबैजान और आर्मेनिया—जो आपसी टकराव के लिए जाने जाते हैं—दोनों ने ही ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सहयोग दिया। यह भारत की संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
विदेश मंत्री ने जताया आभार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आर्मेनिया सरकार का धन्यवाद करते हुए बताया कि भारतीय मछुआरों को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई गई। सैकड़ों भारतीयों को ईरान से निकालकर आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। भारत लगातार क्षेत्रीय सरकारों के साथ समन्वय बनाकर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।
अज़रबैजान ने भी निभाई अहम भूमिका
इससे पहले भारत ने अज़रबैजान का भी आभार जताया था, जहां लगभग 204 भारतीय नागरिक ईरान से जमीनी सीमा पार कर सुरक्षित पहुंचे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, इनमें से कई नागरिक भारत लौट चुके हैं, जबकि बाकी की वापसी प्रक्रिया जारी है।
Thank FM @AraratMirzoyan and the Government of Armenia for facilitating the evacuation of Indian fishermen today from Iran, through Armenia to India.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 4, 2026
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ऊर्जा सुरक्षा में भी संतुलन बनाए रखा
सिर्फ नागरिकों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भारत ने तेल और गैस आपूर्ति के मोर्चे पर भी संतुलन बनाए रखा है। रूस से तेल आयात और ईरान के जरिए होर्मुज मार्ग खुला रखने जैसे फैसलों ने भारत को संकट के समय भी स्थिर बनाए रखा है। यह रणनीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
संकट में भी मजबूत भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह नीति “सबके साथ, संतुलन के साथ” की सोच पर आधारित है। विरोधी देशों से भी सहयोग लेना और अपने हितों को सुरक्षित रखना भारत की कूटनीति की खासियत बनती जा रही है। यही कारण है कि वैश्विक संकट के बीच भी भारत अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की रक्षा करने में सफल दिखाई दे रहा है।