Indias message on global tension: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्षों पर स्पष्ट रुख रखते हुए कहा कि सैन्य टकराव किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने शांतिपूर्ण वार्ता और कूटनीतिक प्रयासों को ही आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। यह बयान उन्होंने ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ बातचीत के बाद दिया। दोनों देशों ने मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच स्थायी और दीर्घकालिक शांति की आवश्यकता पर सहमति जताई।
शांतिपूर्ण समाधान पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया गंभीर और तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है, जिसका प्रभाव हर देश पर पड़ रहा है। ऐसे में संघर्ष के बजाय बातचीत ही समस्याओं को हल करने का सही रास्ता है। उन्होंने विशेष रूप से यूक्रेन और पश्चिम एशिया का जिक्र करते हुए कहा कि भारत इन क्षेत्रों में स्थिर और टिकाऊ शांति का समर्थन करता है। भारत की यह नीति हमेशा से संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने की रही है।
संबंधों को नई दिशा
ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर पहुंचे, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि यूरोप के बाहर पहली यात्रा के लिए भारत का चयन करना दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों का संकेत है। इस यात्रा से व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and Federal Chancellor of Austria Dr Christian Stocker witness the MoU exchange between Dr Robert Zischg, the Ambassador of the Republic of Austria to India, and Shambhu S. Kumaran, Ambassador of India to the Republic of Austria.… pic.twitter.com/MWaJYaQnY4
— ANI (@ANI) April 16, 2026
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जरूरत पर बल
प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि बहुपक्षीय सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। भारत और ऑस्ट्रिया इस बात पर सहमत हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को मजबूत करना ही स्थिरता और शांति सुनिश्चित कर सकता है।
साझेदारी का विस्तार
इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते संबंधों के संदर्भ में इसे एक अहम कदम माना जा रहा है। यह यात्रा न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच साझेदारी को और गहरा करेगी।