Rajnath Singhs Visit Vietnam: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 18 से 21 मई तक वियतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर रहेंगे। इस दौरे को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उत्पादन और नई सैन्य तकनीकों पर अहम बातचीत होगी। भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को आगे बढ़ाने के लिहाज से भी यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वियतनाम में ब्रह्मोस डील पर टिकी निगाहें
राजनाथ सिंह के वियतनाम दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की संभावित डील मानी जा रही है। करीब 5,800 करोड़ रुपये की इस डील के अंतिम चरण में होने की चर्चा है। अगर समझौता होता है तो वियतनाम ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन जाएगा। यह मिसाइल दक्षिण चीन सागर में वियतनाम की समुद्री ताकत को काफी मजबूत कर सकती है।
रक्षा और समुद्री सहयोग को मिलेगी नई गति
भारत वियतनाम के साथ रक्षा तकनीक और सैन्य सहयोग बढ़ाने पर भी जोर देगा। इसमें सुखोई-30 लड़ाकू विमान और किलो क्लास पनडुब्बियों की मरम्मत और अपग्रेड जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे होने के मौके पर कई अहम बैठकों और कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा।
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दक्षिण कोरिया में नई रक्षा तकनीकों पर फोकस
दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक और रक्षा खरीद एजेंसी डापा के प्रमुख से मुलाकात करेंगे। दोनों देश ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। हाल ही में शुरू किए गए KIND-X प्लेटफॉर्म के जरिए रक्षा स्टार्टअप, उद्योग और विश्वविद्यालयों को जोड़ने की योजना है।
चीन के बढ़ते दबदबे के बीच भारत की रणनीतिक तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देश दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दबाव से चिंतित हैं। ऐसे में भारत की रक्षा साझेदारी इन देशों के लिए बेहद अहम बन गई है। ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें और तकनीकी सहयोग भारत की क्षेत्रीय साख और रणनीतिक प्रभाव को और मजबूत कर सकते हैं।