Ram Temple ceremony: अयोध्या में राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति को लेकर पाकिस्तान की आलोचना के बाद भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान ने समारोह को धार्मिक अल्पसंख्यकों पर दबाव का प्रतीक बताया था, जिसे भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड ही अल्पसंख्यकों के दमन, कट्टरता और उत्पीड़न से भरा है, इसलिए उसे किसी अन्य देश पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक आधार नहीं है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि भारत ऐसे बयानों को स्वीकार नहीं करता और पाकिस्तान को दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड पर ध्यान देना चाहिए।
पाकिस्तान की टिप्पणी पर भारत का पलटवार
भारत ने पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों को न सिर्फ अस्वीकार किया, बल्कि दो टूक शब्दों में कहा कि यह मामला भारत की आस्था और उसके सांस्कृतिक गौरव से जुड़ा है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बाबरी मस्जिद विवाद का हवाला देते हुए मंदिर निर्माण पर चिंता जताई थी। इस पर भारत ने कहा कि पड़ोसी देश लगातार भारत के आंतरिक मामलों पर अनावश्यक टिप्पणी करता है, जबकि उसके यहां अल्पसंख्यकों के साथ दूसरे दर्जे का व्यवहार किसी से छिपा नहीं है। भारत ने दोहराया कि राम मंदिर का निर्माण न्यायिक प्रक्रिया और कानून के दायरे में पूरा हुआ है।
यह भी देखेंःCWG 2030 hosting: भारत को मिली CWG 2030 की मेजबानी, अहमदाबाद में होगा भव्य आयोजन
भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम में PM मोदी की मौजूदगी
मंगलवार को राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराने के लिए एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। पीएम मोदी ने इस अवसर पर भगवान राम को नमन किया और कहा कि यह मंदिर केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक शक्ति और सांस्कृतिक एकता का स्थल है। मंदिर परिसर में बने सप्त मंदिरों, ऋषि-आश्रयों और प्रतीकात्मक मूर्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र भारत की सनातन परंपरा और लोक आस्था की झलक प्रस्तुत करता है। करीब 22 फीट लंबे और 11 फीट चौड़े विशेष ध्वज को इलेक्ट्रिक सिस्टम से आरोहित किया गया, जिसे मंदिर निर्माण की पूर्णता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक माना जा रहा है।