दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक समुदाय के सामने भारत की सोच और दृष्टि को मजबूती से रखा। ‘सॉलिडैरिटी, इक्वालिटी, सस्टेनेबिलिटी’ थीम पर आधारित इस सत्र में पीएम मोदी ने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ यानी एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य की अवधारणा को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि अफ्रीकी महाद्वीप में जी-20 का आयोजन ग्लोबल साउथ के लिए ऐतिहासिक क्षण है। मोदी ने गांधीजी के सत्याग्रह का उल्लेख करते हुए इस धरती को वैश्विक एकजुटता का प्रतीक बताया। उन्होंने भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाने को विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
,जलवायु न्याय और तकनीकी सहभागिता पर जोर
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने तीन प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया—सबके लिए आर्थिक विकास, जलवायु लचीलापन और उभरती तकनीकों का जिम्मेदार उपयोग। उन्होंने कहा कि विकास का फायदा अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए और भारत का डिजिटल मॉडल दुनिया के सामने एक सफल उदाहरण है। जलवायु संकट पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी मानवता का मुद्दा है, और ग्लोबल साउथ को जलवायु न्याय मिलना जरूरी है। भारत द्वारा 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने लॉस एंड डैमेज फंड को मजबूत करने की बात कही। एआई पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक को मानवीय मूल्यों से जोड़ना जरूरी है, ताकि असमानता न बढ़े और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार हों, जिससे विश्व समुदाय का प्रतिनिधित्व संतुलित हो सके।
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आतंकवाद पर सख्त रुख और वैश्विक एकता की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद, महामारी और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों को दुनिया की साझा समस्या बताया। उन्होंने कहा कि इनसे निपटने के लिए वैश्विक एकजुटता सबसे बड़ा हथियार है। प्रधानमंत्री ने ‘पूर्ण मानवतावाद’ को भारत की सोच बताते हुए सभी के कल्याण के सिद्धांत पर जोर दिया। 15 मिनट के इस संबोधन के बाद सोशल मीडिया पर #ModiAtG20 तेजी से ट्रेंड करने लगा। विश्लेषकों का कहना है कि मोदी का यह भाषण न सिर्फ ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देता है, बल्कि विश्व मंच पर भारत की नेतृत्व भूमिका को भी और अधिक सशक्त बनाता है। सम्मेलन 23 नवंबर तक जारी रहेगा, जहाँ अंतिम घोषणा पर मोहर लगने की उम्मीद है।