इंडिगो संकट लगातार आठवें दिन भी जारी है और यात्री परेशान हैं। संचालन सामान्य न होने पर सरकार ने पहले एयरलाइन की 10% फ्लाइट्स कम करने का निर्देश दिया। अब सरकारी सूत्रों के अनुसार, इंडिगो की इन कम की गई उड़ानों को दूसरे एयर ऑपरेटर्स में बांटा जाएगा। इसका मतलब है कि एयर इंडिया, स्पाइसजेट, अकासा जैसी कंपनियों को अतिरिक्त स्पेस मिलेगा। यह कदम इंडिगो के लिए बड़ा झटका है और संदेश साफ है यात्री सेवाओं में लापरवाही सीधे एयरलाइन की हिस्सेदारी और साख पर असर डाल सकती है।
क्यों जरूरी हुआ उड़ानों का रीडिस्ट्रिब्यूशन
सरकार के इस फैसले का कारण भी साफ है यात्रियों को परेशानी से बचाना और बाजार में संतुलन बनाए रखना। इंडिगो की 10% उड़ानें कटने से यात्रियों के पास विकल्प कम हो रहे थे। अब इन्हीं उड़ानों को दूसरे भरोसेमंद ऑपरेटरों को दिया जाएगा ताकि यात्री ट्रैफिक बना रहे और कैंसिलेशन का सिलसिला रुके। यह शेयर उनके फ्लीट साइज और मौजूदा क्षमता के आधार पर दिया जाएगा। रीडिस्ट्रिब्यूशन से इंडिगो को चार बड़े झटके लगने तय हैं।
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पहला, मार्केट शेयर गिरने का बड़ा खतरा
इंडिगो हर दिन लगभग 2200 उड़ानें भरता है। 10% कट का मतलब रोज 220 फ्लाइट्स कम। यह सीधे इंडिगो की पकड़ कमजोर करेगा। एयरलाइन अभी 65% मार्केट शेयर के साथ भारत की सबसे बड़ी कंपनी है। लेकिन फ्लाइट कट और रीडिस्ट्रिब्यूशन का असर इसके मार्केट शेयर को 55–57% तक गिरा सकता है। लंबे समय में यह गिरावट इंडिगो के पूरे बिजनेस मॉडल पर दबाव बढ़ा सकती है और प्रतियोगियों को मजबूत जगह दे सकती है।
कमाई और शेयर पर पड़ सकता है असर
सबसे ज्यादा उड़ानें भरने वाली एयरलाइन होने के कारण इंडिगो हमेशा से कमाई के मामले में टॉप रही है। मगर रोज 220 फ्लाइट्स कम होना और उनकी रीडिस्ट्रिब्यूशन सीधा राजस्व घटाएगा। दूसरी ओर, संकट बढ़ने से इंटरग्लोब एविएशन के शेयर पहले ही 5 दिनों में 12% टूट चुके हैं और मार्केट कैप घटकर 1.89 लाख करोड़ रह गया है। अब सरकार की और सख्ती से शेयर में और गिरावट संभव है। इससे इंडिगो में निवेश करने वाले भी प्रभावित होंगे।