इंदिरा एकादशी का पवित्र पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस बार अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी 17 सितंबर को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के पाप क्षय होते हैं और पितृ प्रसन्न होकर सुख, समृद्धि व स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार इस बार विशेष शुभ योग बन रहे हैं, जो इसे और भी पवित्र बना देते हैं। खास बात यह है कि इस एकादशी पर घी, दही और अन्न का दान करना विशेष फलदायक माना गया है।
इंदिरा एकादशी कब मनाई जाएगी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष इंदिरा एकादशी तिथि 16 सितंबर की रात 12:21 बजे से आरंभ होगी और 17 सितंबर को रात 11:39 बजे समाप्त होगी। परंपरा अनुसार सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। अतः इंदिरा एकादशी 17 सितंबर को पूरे विधिपूर्वक मनाई जाएगी। इस दिन विशेष योग और परिघ योग बन रहे हैं, जो धार्मिक अनुष्ठान में और भी अधिक महत्व जोड़ते हैं।
इंदिरा एकादशी पर करें विशेष दान
इस दिन विशेष रूप से घी, दूध, दही और अन्न का दान करने की परंपरा है। दान से न केवल पितरों की प्रसन्नता होती है, बल्कि इसे सुख, समृद्धि व स्वास्थ्य में वृद्धि का भी मार्ग माना जाता है। जरूरतमंदों को भोजन कराना, अन्न दान करना, व्रती के पुण्य कर्म माने जाते हैं। कहा जाता है कि इन वस्तुओं का दान करने से व्यक्ति के घर में धन लाभ होता है और समस्त कष्ट दूर होते हैं।
इंदिरा एकादशी पर विधिपूर्वक पूजा करने का तरीका
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। उसके बाद व्रत संकल्प लेकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं और पीले रंग के फूल अर्पित करें। पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना जाता है। मिठाई और फल भी अर्पित करें। इस दिन व्रत की कथा अवश्य सुनें और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होकर आरती करें। पितरों की स्मृति में उन्हें भी श्रद्धांजलि दें ताकि उनकी कृपा बनी रहे।
पितृ की प्रसन्नता से जीवन में आएगी खुशहाली
इस पावन दिन पर पितरों का स्मरण व दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पंडितों का मानना है कि इंदिरा एकादशी पर किए गए कर्म पितृ प्रसन्नता का मार्ग बनते हैं। यह न केवल पापों के प्रायश्चित का अवसर है, बल्कि घर में सुख-शांति व समृद्धि का भी प्रतीक है। विशेष योग बनने के कारण यह पर्व इस बार और भी महत्व रखता है।
इस बार इंदिरा एकादशी 17 सितंबर को विधिपूर्वक मनाएं और पवित्रता का अनुभव करें।