मध्यप्रदेश के इंदौर सेंट्रल जेल ने एक नई पहल के तहत मसाला उत्पादन उद्योग की शुरुआत की है। यह प्रदेश की पहली जेल है जहां "मां अहिल्या मसाला उद्योग एवं प्रशिक्षण केंद्र" की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य न केवल कैदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देना है, बल्कि जेलों में उपयोग के लिए शुद्ध मसाले तैयार करना भी है। 15 कैदी इस यूनिट में काम करेंगे और तैयार मसाले अन्य जिलों की जेलों में भी सप्लाई किए जाएंगे। इस उद्योग की टैगलाइन है– "शुद्धता ही हमारी पहचान।"
जेल में कैदियों के लिए रोजगार का नया जरिया
इंदौर सेंट्रल जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने बताया कि जेल प्रशासन का उद्देश्य कैदियों का मानसिक और सामाजिक पुनर्वास करना है। इसी दिशा में एक और कदम उठाते हुए मसाला उद्योग की शुरुआत की गई है। इसमें 2.5 लाख रुपये की लागत से मशीनें और जरूरी उपकरण लगाए गए हैं। प्रारंभिक चरण में धनिया, हल्दी, मिर्च और गरम मसाले बनाए जाएंगे। इन मसालों का उपयोग जेल के आहार में होगा और अतिरिक्त उत्पादन को अन्य जिलों की जेलों में भी भेजा जाएगा।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते बंदी
यह मसाला केंद्र न केवल रोजगार का साधन बनेगा, बल्कि कैदियों को प्रशिक्षण भी देगा ताकि वे रिहाई के बाद समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। 15 कैदी यहां काम शुरू कर चुके हैं और जरूरत पड़ने पर यह संख्या बढ़ाई जाएगी। "मां अहिल्या मसाला" ब्रांड के तहत यह उत्पाद शुद्धता के मानकों पर खरे उतरेंगे। इसके लिए खड़े मसालों की खरीदी भी शुद्ध स्रोतों से की जाएगी।
भविष्य की योजना और विस्तार
जेल डीजी जीपी सिंह ने इस परियोजना का शुभारंभ किया और इसे प्रदेश की अन्य जेलों में भी लागू करने की बात कही। इंदौर कलेक्टर से मसालों की सार्वजनिक बिक्री के लिए अनुमति मांगी जाएगी ताकि अस्पतालों, कैंटीनों और स्थानीय आउटलेट्स में भी इन उत्पादों को बेचा जा सके। इससे न केवल कैदियों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि समाज में पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा बदलाव आएगा।