इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली उल्टी-दस्त की बीमारी ने शहर को हिला दिया है। अब तक 17 लोगों की मौत के बाद हालात इतने गंभीर हो गए कि स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टर्स की सभी छुट्टियां रद्द करनी पड़ीं। ICMR ने पहले इसे महामारी की श्रेणी में रखा और बाद में ‘आउटब्रेक’ बताया। प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
भागीरथपुरा में बढ़ता मौतों का आंकड़ा
नगरीय विकास मंत्री की विधानसभा इंदौर-1 के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी लगातार जान ले रही है। हाल ही में धार से आए रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओम प्रकाश शर्मा (69) की इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें 1 जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। किडनी फेल होने और सांस की दिक्कत के चलते उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन जान नहीं बच सकी।
स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, छुट्टियां रद्द
17 मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। स्थिति को काबू में रखने के लिए सभी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी, जहां अब तक 398 लोग भर्ती हुए, जबकि 142 मरीजों का इलाज अभी जारी है।
मासूम की मौत, मां की हालत नाजुक
इस त्रासदी ने परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं। पांच दिन पहले 6 माह के अव्यान साहू की मौत हो चुकी है। अब उसकी मां साधना साहू की हालत भी बिगड़ गई है। उल्टी और तेज बुखार के चलते उन्हें क्लीनिक में इलाज दिया जा रहा है। स्थानीय लोग लगातार डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं।
ICMR का रुख: महामारी से प्रकोप तक
इलाके में मरीजों की संख्या बढ़ने पर ICMR ने भागीरथपुरा को पहले एपिडेमिक यानी महामारी घोषित कर जांच शुरू की। बाद में मरीजों की संख्या घटने और संक्रमण के सीमित दायरे को देखते हुए इसे ‘आउटब्रेक’ बताया गया। वैज्ञानिक अब संक्रमण के स्रोत, पानी की गुणवत्ता और बीमारी के पैटर्न का विश्लेषण कर रहे हैं।
संक्रमण की जड़ तलाशने में जुटी टीमें
स्वास्थ्य विभाग और वैज्ञानिकों ने क्षेत्र को 32 हिस्सों में बांटकर सर्वे शुरू किया है। घर-घर ओआरएस, उल्टी-दस्त की दवाएं और पानी शुद्ध करने की गोलियां बांटी जा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार 29, 30 और 31 दिसंबर को मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा थी, फिलहाल ग्राफ में कुछ गिरावट दर्ज हुई है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद इलाके में बोरिंग के भूमिपूजन किए गए, लेकिन साफ पानी घरों तक कैसे पहुंचेगा, इस पर कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई। 17 मौतों के बाद नगर निगम, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीड़ितों से मिलने पहुंचेंगे नेता
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और उमंग सिंगार पीड़ित परिवारों से मिलने वाले हैं। उनका कहना है कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं बल्कि मानवीय संवेदना का है। प्रशासन को पीड़ितों के बीच जाने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है।