
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौत ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने जिला कलेक्टर को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई जन स्वास्थ्य अभियान (जेएसए) की शिकायत के आधार पर की गई है। बताया जा रहा है कि बीते दिनों अस्पताल में भर्ती दो नवजात शिशुओं को चूहों ने कुतर दिया था। इलाज के दौरान दोनों शिशुओं ने एक के बाल एक दम तोड़ दिया। इस पर जन स्वास्थ्य अभियान ने बुधवार को आयोग से शिकायत दर्ज की थी। आयोग ने गुरुवार को जिला कलेक्टर को तीन दिनों के अंदर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने आदेश दिया गया है। नोटिस की एक प्रति जेएसए मध्य प्रदेश को भेजी गई है।
स्वतंत्र और तथ्यपरक जांच कराई जाए
जेएसए मध्य प्रदेश के वसीम इकबाल और सुधा तिवारी का कहना है कि एनसीपीसीआर का यह फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि यह घटना बाल अधिकारों, संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल और अस्पताल सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन है। उनकी मांग है कि एनआईसीयू में भर्ती सभी बच्चों की तुरंत सुरक्षा तय की जाए। विश्वसनीय विशेषज्ञों की ओर से स्वतंत्र और तथ्यपरक जांच कराई जाए और लापरवाही के लिए एम.वाय.एच. अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
कीट-नियंत्रण का ऑडिट किया जाए
जन स्वास्थ्य अभियान की मांग है कि राज्यव्यापी स्तर पर नवजात और बाल चिकित्सा वार्डों में संक्रमण-रोकथाम और कीट-नियंत्रण का ऑडिट किया जाए। जेएसए मध्य प्रदेश के डॉ. जी.डी. वर्मा और राहुल यादव ने एनसीपीसीआर के हस्तक्षेप का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को इस त्रासदी से सबक लेना चाहिए। सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए। इस मामले को लेकर राज्य सरकार ने भी गंभीरता दिखाई है। उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही हुई है, उनके खिलाफ कार्रवाई आरंभ कर दी गई है।