मध्यप्रदेश के इंदौर-देवास रोड पर बीते शुक्रवार को हालात इतने बदतर हो गए कि जाम की वजह से 32 घंटे तक हजारों वाहन फंसे रहे। करीब 8 किलोमीटर तक लगे इस जाम में फंसे तीन लोगों की जान चली गई। दो लोगों को दिल का दौरा पड़ा, वहीं एक गंभीर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सका और दम तोड़ दिया। इस
भयावह स्थिति ने सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भीषण जाम में फंसे 4 हजार वाहन
शुक्रवार को इंदौर-देवास रोड पर अचानक से भीषण जाम लग गया। जाम की लंबाई करीब 8 किलोमीटर तक पहुंच गई और इसमें लगभग 4 हजार से ज्यादा वाहन घंटों तक फंसे रहे। इस दौरान लोगों को भूख-प्यास और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालात इतने गंभीर हो गए कि तीन लोगों की जान तक चली गई।
दिल का दौरा पड़ने से दो की मौत
जाम में फंसे लोगों में से दो बुजुर्गों को घबराहट और बेचैनी होने लगी। करीब डेढ़ घंटे तक उनकी गाड़ी जाम में फंसी रही और समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण उन्हें हार्ट अटैक आया। परिजन किसी तरह उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मरीज की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत
जाम का सबसे दर्दनाक पहलू तब सामने आया जब एक बीमार मरीज को परिजन अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन भारी ट्रैफिक के कारण एंबुलेंस जाम में फंसी रह गई। रास्ते में ही मरीज की सांसें थम गईं। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
किसान की जान गई, परिवार बेहाल
मृतकों में एक बुजुर्ग किसान कमल पांचाल भी शामिल थे, जो एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे। अर्जुन बड़ौदा के पास उनकी कार जाम में फंस गई। घबराहट के कारण उनकी हालत बिगड़ती गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो गया। परिजनों ने प्रशासन पर जाम हटाने में लापरवाही का आरोप लगाया।
प्रशासन की तैयारी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया कि जाम हटाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। बारिश की वजह से हालात और बदतर हो गए। वहीं, जिला प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान चालानी कार्रवाई नहीं की जाएगी लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। मृतकों के अंतिम संस्कार के बाद अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर समय रहते राहत क्यों नहीं पहुंचाई गई।