मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से प्रशासनिक लापरवाही की एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां राज्यपाल के ठहरने के लिए चुनी गई रेसीडेंसी कोठी की रसोई में कॉकरोच और सड़ी-गली सामग्री मिलने से हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान सामने आई इस अव्यवस्था के बाद राज्यपाल ने भोजन करने से साफ इनकार कर दिया। मामले ने सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्यपाल के दौरे के बीच सामने आई बड़ी चूक
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल इंदौर दौरे पर थे। वे एक शैक्षणिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे और शहर की ऐतिहासिक रेसीडेंसी कोठी में ठहरे हुए थे। यह वही स्थान है जहां वीआईपी मेहमानों की व्यवस्था की जाती है। लेकिन इसी दौरान वहां की व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां उजागर हो गईं, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए।
किचन निरीक्षण में मिली गंदगी और कॉकरोच
सुबह निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जब रसोई का जायजा लिया तो वहां की स्थिति देखकर वे हैरान रह गए। किचन में कॉकरोच और कीड़े घूमते पाए गए, जबकि कई बर्तन गंदे पड़े थे। कुछ खाद्य सामग्री भी सड़ी-गली हालत में मिली। यह जानकारी जब राज्यपाल तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत भोजन करने से इनकार कर दिया। संबंधित किचन इंचार्ज को फटकार लगाई गई और पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की गई।
बेडशीट पर दाग, हाउसकीपिंग पर भी सवाल
सिर्फ रसोई ही नहीं, ठहरने की व्यवस्था में भी लापरवाही सामने आई। सुरक्षा में तैनात अधिकारियों को दाग-धब्बों वाली बेडशीट उपलब्ध कराई गई थी। जब साफ बेडशीट की मांग की गई तो कर्मचारियों के पास संतोषजनक जवाब नहीं था। इससे हाउसकीपिंग व्यवस्था की भी पोल खुल गई। बताया जा रहा है कि रखरखाव की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी के पास है, जिसका भुगतान लंबे समय से लंबित बताया जा रहा है।
कलेक्टर तलब, जवाबदेही तय करने की तैयारी
घटना के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर से पूरे मामले में जवाब मांगा गया है और जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। यह भी जांच की जा रही है कि नियमित निरीक्षण क्यों नहीं हुआ और वीआईपी दौरे से पहले व्यवस्थाओं की समीक्षा क्यों नहीं की गई। प्रशासन अब सुधारात्मक कदम उठाने की बात कह रहा है।
सरकारी मेहमाननवाजी पर उठे गंभीर सवाल
इंदौर को स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान मिली है, लेकिन इस घटना ने उस छवि को झटका दिया है। सवाल यह है कि जब राज्यपाल के ठहरने वाले स्थान की यह स्थिति है, तो आम व्यवस्थाओं का हाल क्या होगा? अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।