मध्यप्रदेश के इंदौर में हर साल सावन मास में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है, जो श्रद्धा, प्रकृति और चमत्कार का अद्वितीय संगम है। पंचकुइया स्थित रामपत हनुमान मंदिर में लाखों पक्षी, विशेष रूप से तोते, भगवान के समक्ष दंडवत प्रणाम करते हैं और मंदिर की परिक्रमा भी करते हैं। इसके बाद मंदिर परिसर में उनके लिए विशेष भंडारे का आयोजन होता है, जो पंगतों के नियम अनुसार संपन्न होता है। यह दृश्य न केवल भक्तों को चकित करता है, बल्कि श्रद्धा से भर देता है।
दंडवत प्रणाम और परिक्रमा करते हैं पक्षी
रामपत हनुमान मंदिर में हर साल श्रावण मास के दौरान सुबह 5:30 बजे से पक्षियों का आगमन शुरू होता है। इनमें सबसे बड़ी संख्या तोतों की होती है। वे पहले मंदिर की परिक्रमा करते हैं, फिर भगवान के सामने दंडवत प्रणाम करते हैं। यह दृश्य मानो किसी तपस्वी की श्रद्धा का प्रतीक हो।
ध्वज पर बैठता है तोता, तब शुरू होता है भंडारा
जब तोतों का एक झुंड मंदिर के ध्वज पर बैठता है, तभी पक्षियों के भंडारे की शुरुआत होती है। मंदिर की छत पर बड़ी मात्रा में ज्वार डाला जाता है। पक्षी पंगतों में आकर अनुशासित तरीके से दाना चुगते हैं और फिर उड़ जाते हैं। चार से पांच पंगतों में यह प्रक्रिया होती है।
संतों की तपोभूमि, पक्षियों का पुनर्जन्म
स्थानीय मान्यता है कि यह स्थान संतों की तपोभूमि रहा है। माना जाता है कि ये पक्षी उन्हीं संतों का रूप हैं जो पुनर्जन्म लेकर हर साल यहां आते हैं। यह आयोजन संतों के महाकुंभ जैसा पक्षियों का आध्यात्मिक मेला माना जाता है।