इंदौर में सामने आए नए हनीट्रैप मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली और गुजरात तक सक्रिय था। आरोपियों के मोबाइल और डिजिटल डिवाइस से 100 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो मिलने के बाद पुलिस जांच और तेज हो गई है। ब्लैकमेलिंग, दबाव और करोड़ों रुपए की उगाही के आरोपों के बीच कई रसूखदार लोगों के नाम भी चर्चा में हैं।
सुनियोजित तरीके से चल रहा था नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि पूरा रैकेट बेहद प्लानिंग के साथ संचालित किया जा रहा था। भोपाल से नेटवर्क को नियंत्रित किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मुख्य आरोपी सीधे संपर्क में आने से बचती थी और अन्य सहयोगियों के जरिए लोगों तक पहुंच बनाई जाती थी। संपर्कों की जानकारी जुटाकर टारगेट तय किए जाते थे और फिर पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया जाता था।
वीडियो बनाकर की जाती थी ब्लैकमेलिंग
जांच के दौरान पुलिस को 100 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इन वीडियो का इस्तेमाल लोगों पर दबाव बनाने और पैसों की मांग करने के लिए किया जाता था। कुछ मामलों में बड़ी रकम वसूले जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि वीडियो को बड़े स्तर पर बेचने या राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही थी।
कारोबारी की शिकायत से खुली परतें
इस पूरे मामले का खुलासा एक कारोबारी की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सुपर कॉरिडोर इलाके में उसके साथ मारपीट की गई और आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई। घटना के बाद मामला तेजी से पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू हुई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को हिरासत में लिया और डिजिटल सबूत जुटाने शुरू किए।
जांच में सामने आए कई नए नाम
मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए नाम सामने आ रहे हैं। कुछ गिरफ्तार आरोपियों में पुलिस विभाग और मीडिया से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस नेटवर्क को किसी तरह का संरक्षण हासिल था। कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और चैट रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
जेल में बनी पहचान, बाहर तैयार हुआ गिरोह
जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़ी दो महिलाओं की मुलाकात जेल में हुई थी। वहीं से दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और बाहर आने के बाद कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग नेटवर्क खड़ा किया गया। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के आर्थिक लेन-देन, संपर्कों और अन्य राज्यों तक फैले कनेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।