मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने अब राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। लगातार सामने आ रही मौतों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला बोला है। सड़कों से लेकर निगम कार्यालयों तक पोस्टर वार के जरिए कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए इसे प्रशासनिक विफलता और संवेदनहीनता का प्रतीक बताया है।
दूषित पानी बना सियासी मुद्दा
इंदौर में गंदे पानी की आपूर्ति से हुई मौतों का मामला अब केवल प्रशासनिक चूक तक सीमित नहीं रहा। इसे लेकर कांग्रेस ने भाजपा शासित नगर निगम और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी का आरोप है कि समय रहते चेतावनी और कार्रवाई होती, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। कांग्रेस का कहना है कि जनता को सुरक्षित पेयजल देना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है, जिसमें वह पूरी तरह विफल रही।
सरकार और प्रशासन पर सीधे आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम को “घोर लापरवाही” करार दिया। उन्होंने कहा कि इंदौर जैसे बड़े शहर में दूषित पानी से लोगों की जान जाना बेहद गंभीर मामला है। पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस प्रकरण के लिए एक सक्षम और स्वतंत्र प्रभारी मंत्री की तत्काल नियुक्ति की जाए, जिसके पास जवाबदेही तय करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के स्पष्ट अधिकार हों।
1-1 करोड़ मुआवजे की मांग
कांग्रेस ने मृतकों के परिजनों के लिए 1-1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग उठाई है। पार्टी का तर्क है कि जब सरकार की लापरवाही से मौतें हुई हैं, तो जिम्मेदारी भी सरकार को ही लेनी चाहिए। इसके साथ ही कांग्रेस ने दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग भी की है।
पोस्टर वार से बढ़ा राजनीतिक तापमान
घटनाक्रम के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम मुख्यालय, ज़ोन कार्यालयों और प्रभावित इलाकों में पोस्टर लगाए। इन पोस्टरों में “यमराज कमल छाप” और “मौत का पानी” जैसे तीखे नारे लिखे गए, जो सीधे तौर पर भाजपा और नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं। पोस्टर वार के बाद शहर का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
जनता के भरोसे पर सवाल
कांग्रेस का कहना है कि जनता ने भाजपा को हर स्तर पर सत्ता सौंपी, लेकिन बदले में शहर को सुरक्षित बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। पार्टी ने इसे भरोसे के साथ धोखा बताते हुए चेतावनी दी है कि जब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा।