मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक महिला शिक्षक की जिंदगी उस मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां दर्द सहते-सहते अब मौत ही राहत लगती है। बचपन से ही दुर्लभ बीमारी 'अस्थि भंगुर रोग' (Osteogenesis Imperfecta) से जूझ रहीं प्राइमरी टीचर चंद्रकांता जेठवानी ने अब महामहिम राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी है। उनका शरीर पूरी तरह जवाब दे चुका है, लेकिन शिक्षण के प्रति उनका समर्पण आज भी जीवित है। व्हीलचेयर पर बैठकर रोज स्कूल जाना उनकी जिजीविषा का प्रमाण है।
बचपन से जंग, अब थक चुकी हैं चंद्रकांता
चंद्रकांता जेठवानी का शरीर कभी भी सामान्य नहीं रहा। हड्डियां इतनी कमजोर हैं कि बिना चोट के भी टूट जाती हैं। चार बार सर्जरी हो चुकी है लेकिन हालत सुधरने की बजाय बिगड़ती चली गई। उन्होंने किसी तरह पढ़ाई पूरी की और 2001 में शिक्षक बन गईं। धीरे-धीरे स्कूटी से स्कूल जाने लगीं, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि करवट बदलना भी संभव नहीं।
इच्छामृत्यु की मांग, क्योंकि अब ‘ज़िंदगी बोझ लगने लगी है’
2020 के बाद एक और सर्जरी के बाद उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि अब वो ठीक से बैठ भी नहीं सकतीं। डायबिटीज, स्किन एलर्जी, नसों में सूजन जैसी बीमारियों ने शरीर को पूरी तरह थका दिया है। चंद्रकांता ने कहा कि अब ये जीवन सिर्फ दर्द और लाचारी का प्रतीक बन चुका है, इसलिए सम्मानपूर्वक मरने की इजाजत मांगी है।
बच्चों और ऑटोवाले को बना दिया ‘अपना सब कुछ’
अपनी संपत्ति भी उन्होंने पहले छह छात्रों के नाम की थी। अब कुछ और जरूरतमंद बच्चों और एक ऑटो ड्राइवर को भी अपनी वसीयत में जोड़ना चाहती हैं, जो बीते छह साल से उन्हें स्कूल लाने-ले जाने का काम कर रहा है। उनका कहना है कि जब समाज ने मुंह मोड़ा, तब इन बच्चों और इस ऑटोवाले ने उन्हें इंसान की तरह समझा।
पहले भी मांगी थी मौत की इजाजत, अब राष्ट्रपति से आखिरी उम्मीद
इससे पहले 2017 में भी उन्होंने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की थी, लेकिन तब कानूनी प्रावधानों के कारण मना कर दिया गया था। अब उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि उन्हें सम्मानपूर्वक मरने की इजाजत दी जाए।
सरकार से एक और अपील: केयरटेकर दे दो
चंद्रकांता ने एक और मांग की है कि उन्हें एक फुल-टाइम केयरटेकर उपलब्ध कराया जाए। सामाजिक न्याय विभाग की टीम ने काउंसलिंग के बाद इस पर सकारात्मक जवाब दिया है और जल्द व्यवस्था करने का आश्वासन भी दिया है।