इंदौर नगर निगम का बजट सत्र उस वक्त विवादों में घिर गया, जब ‘वंदे मातरम’ के गान को लेकर सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के गाने से इनकार और फिर सदन से निष्कासन ने पूरे घटनाक्रम को तूल दे दिया। इसके बाद बयानबाजी, चुनौती और पलटवार का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसने पूरे माहौल को राजनीतिक के साथ-साथ वैचारिक टकराव में बदल दिया।
सत्र में गूंजा विरोध, बढ़ा टकराव
नगर निगम के बजट सत्र के दौरान जैसे ही ‘वंदे मातरम’ का गान शुरू हुआ, कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने इसे गाने से साफ इनकार कर दिया। इस कदम ने माहौल को अचानक गरमा दिया। बीजेपी पार्षदों ने इसे देशभक्ति से जोड़ते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।
अनुशासन के नाम पर कार्रवाई
स्थिति बिगड़ती देख सभापति मुन्नालाल यादव ने हस्तक्षेप किया और व्यवस्था बनाए रखने के लिए फौजिया अलीम को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया। यह कार्रवाई राजनीतिक से ज्यादा अनुशासनात्मक बताई गई, लेकिन इसके पीछे की सियासी परतें साफ नजर आईं।
बयान जिसने भड़काई आग
सदन से बाहर आने के बाद फौजिया अलीम ने कहा कि “भारत माता की पूजा करना जरूरी नहीं है” और ‘वंदे मातरम’ गाने की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्षद रूबीना इकबाल खान ने बहस के दौरान चुनौतीपूर्ण लहजे में कहा कि कोई उन्हें ‘वंदे मातरम’ बुलवाकर दिखाए। इस बयान ने विवाद को और ज्यादा भड़का दिया।
महापौर का कड़ा पलटवार
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश और राष्ट्रगौरव किसी भी धर्म से ऊपर है। उन्होंने साफ कहा कि ‘वंदे मातरम’ का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके बयान को राजनीतिक चेतावनी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस
विवाद बढ़ता देख नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने सफाई देते हुए कहा कि यह व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं, पार्टी का नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि मामले की जानकारी प्रदेश नेतृत्व को दे दी गई है और आगे की कार्रवाई वहीं से तय होगी। फिलहाल यह पूरा मामला राजनीतिक रणनीति और वैचारिक टकराव का केंद्र बन चुका है।