इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैला संकट सात दिन बाद भी काबू में नहीं आ सका है। उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि रोज नए मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं और कई की हालत नाजुक बनी हुई है। प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच आम लोग अब भी सुरक्षित पानी के लिए जूझ रहे हैं।
7वें दिन भी बढ़ते मरीज, 65 नए केस सामने आए
रविवार को संजीवनी क्लीनिक और आंगनवाड़ी केंद्रों में 65 नए मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें से 28 को गंभीर दस्त की शिकायत थी। कई ऐसे मरीज भी सामने आए, जिन्हें पहले कोई लक्षण नहीं थे, लेकिन अब अचानक उल्टी-दस्त की समस्या हो गई। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद कुछ मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया। अब तक दूषित पानी से बीमार लोगों की संख्या करीब 1800 तक पहुंच चुकी है।
150 मरीज भर्ती, 16 ICU में जिंदगी से जंग
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार करीब 150 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 16 मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं, जिनकी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। सबसे ज्यादा खतरे में बुजुर्ग और छोटे बच्चे हैं, जिनमें संक्रमण तेजी से असर कर रहा है।
अफसर-नेता टकराव की कीमत जनता ने चुकाई
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से अफसरों और नेताओं के बीच खींचतान चल रही थी। शिकायतें सामने आने के बावजूद समय पर समाधान नहीं हुआ। नतीजा यह रहा कि घरों तक दूषित और शौचालय मिला पानी पहुंचता रहा। हालात बिगड़ने पर प्रशासनिक बदलाव जरूर हुए, लेकिन तब तक कई परिवार अपनों को खो चुके थे।
पानी की रिपोर्ट पर सवाल, मौतों के आंकड़ों में विरोधाभास
निजी लैब की रिपोर्ट में पानी को फिलहाल बैक्टीरिया मुक्त बताया गया है, लेकिन जमीनी हालात इससे मेल नहीं खाते। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मौतों की संख्या 16 तक पहुंच चुकी है, जबकि विभाग इससे कम आंकड़ा स्वीकार कर रहा है। अब मामले की विस्तृत ऑडिट जांच की बात कही जा रही है।
मेडिकल जांच में खतरनाक बैक्टीरिया के संकेत
प्रारंभिक मेडिकल जांच में कुछ सैंपल में हैजा फैलाने वाले बैक्टीरिया के संकेत मिले हैं। यह संक्रमण बेहद तेजी से फैलता है और समय रहते नियंत्रण न हो तो जानलेवा साबित हो सकता है। इसी वजह से इलाके को विशेष निगरानी में रखा गया है।
एपिडेमिक जोन घोषित, 32 बीट में सर्वे
वैज्ञानिक टीम ने भागीरथपुरा को एपिडेमिक श्रेणी में रखते हुए 32 बीट में बांटकर सर्वे शुरू किया है। पानी के स्रोत, संक्रमण के कारण और प्रभावित लोगों की संख्या का विश्लेषण किया जा रहा है। नए निगमायुक्त ने भरोसा दिलाया है कि सभी जल स्रोतों की सैंपलिंग जारी है और वैकल्पिक व्यवस्था पर काम हो रहा है।