देश की खाद्य राजधानी के रूप में पहचान बना चुके इंदौर ने एक बार फिर अपनी खास संस्कृति और खानपान की परंपरा को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। विश्व पोहा दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रकार के पोहे प्रदर्शित किए गए, जबकि 1000 से ज्यादा लोगों ने एक साथ पोहे का स्वाद लिया। इस अनूठे आयोजन ने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी अपनी जगह बनाई।
पोहे के नाम रहा पूरा दिन
विश्व पोहा दिवस के मौके पर इंदौर में एक विशेष आयोजन किया गया, जिसमें पोहे की विविधता और लोकप्रियता को अनोखे अंदाज में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में पारंपरिक से लेकर आधुनिक स्वाद वाले पोहे की 100 अलग-अलग वैरायटी प्रदर्शित की गईं। इन व्यंजनों ने भारतीय खानपान की समृद्ध परंपरा और पोहे की बहुमुखी पहचान को दर्शाया।
1000 से ज्यादा लोगों ने लिया हिस्सा
आयोजन का सबसे आकर्षक पहलू एक साथ 1000 से अधिक लोगों का पोहा खाना रहा। शहर के नागरिकों, फूड लवर्स और विभिन्न वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर पोहे का स्वाद लिया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। सामूहिक रूप से पोहा खाने के इस आयोजन ने लोगों के बीच उत्साह और एकता का संदेश भी दिया।
रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुई उपलब्धि
इस विशेष आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला। आयोजकों के अनुसार, एक ही मंच पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी और पोहे की इतनी अधिक वैरायटी का प्रदर्शन अपने आप में अनूठा रहा। इस उपलब्धि ने इंदौर को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाई है।
प्रसिद्ध शेफ और सांस्कृतिक गतिविधियों का संगम
कार्यक्रम में शहर के प्रसिद्ध शेफ ने पोहे की कई पारंपरिक और नई रेसिपियां प्रस्तुत कीं। इसके अलावा जुम्बा, गेम्स और विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इससे आयोजन केवल खाद्य उत्सव ही नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक महोत्सव में बदल गया।
इंदौर और पोहे का अटूट रिश्ता
इंदौर को लंबे समय से देश की पोहा राजधानी के रूप में जाना जाता है। यहां की सुबह पोहे और जलेबी के स्वाद के बिना अधूरी मानी जाती है। विश्व पोहा दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पोहा केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि इंदौर की पहचान, संस्कृति और जीवनशैली का अहम हिस्सा है।