देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से दो दिन के भीतर 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। लापरवाही, लीकेज और समय पर कार्रवाई न होने से यह स्वास्थ्य आपदा बनी, जिस पर अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
कैसे फैला दूषित पानी
भागीरथपुरा क्षेत्र में करीब 10–12 दिन पहले नगर निगम की मेन और डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन में लीकेज हुआ। इस दौरान शौचालय और आसपास की फैक्ट्रियों का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया। शिकायतों के बावजूद पानी की आपूर्ति बंद नहीं की गई, जिससे सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए।
हाईकोर्ट का संज्ञान, दो दिन में रिपोर्ट तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने प्रशासन को दो दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रभावित सभी मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।
अस्पतालों में हालात गंभीर
बुधवार शाम तक 38 नए मरीज सामने आए, जिनमें से 10 को गंभीर हालत में रेफर किया गया। अब तक मृतकों में 6 माह का मासूम अव्यान साहू, 80 वर्षीय जीवन बरेडे, अशोक पवार, शंकर भाया और सुमित्रा देवी शामिल हैं। कई परिवारों में अब भी बीमारी का डर बना हुआ है।
मासूम की मौत ने झकझोरा
सुनील साहू के घर 11 साल बाद जन्मा बेटा अव्यान, दूषित पानी से बनी बीमारी का शिकार हो गया। मां ने दूध में पानी मिलाकर बच्चे को पिलाया, जिससे उसे तेज उल्टी-दस्त हुए और रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं। यह कहानी पूरे इलाके की पीड़ा बयां करती है।
राजनीति और जांच की पहल
घटना के बाद नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इलाज, मुआवजा और जांच की मांग की है। वहीं कांग्रेस ने भी पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है, जो 5 जनवरी को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
जिम्मेदार कौन? जनता पूछ रही जवाब
स्थानीय लोग निगम अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और जल आपूर्ति से जुड़े इंजीनियरों पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। शिकायतों को अनदेखा करने, समय पर मरम्मत न कराने और टेंडर प्रक्रिया में देरी जैसे सवाल उठ रहे हैं। कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है, लेकिन जनता ठोस कार्रवाई चाहती है।
आगे क्या?
यह घटना सिर्फ एक इलाके की नहीं, बल्कि शहरी व्यवस्थाओं की बड़ी विफलता है। सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का अधिकार है। अब निगाहें प्रशासन की रिपोर्ट, कोर्ट की अगली सुनवाई और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।