मध्य प्रदेश के आर्थिक केंद्र इंदौर में एक के बाद एक सामने आ रही घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। दूषित पानी से 22 लोगों की मौत का मामला अभी थमा भी नहीं था कि अब गोवंश संरक्षण को लेकर बड़ा विवाद सामने आ गया है। शहर की एक सरकारी गौशाला में 20 गायों की मौत ने न सिर्फ संवेदनाएं झकझोर दी हैं, बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी गरमा दिया है।
गौशाला में मिलीं मृत गायें, मचा हड़कंप
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में स्थित रेशम केंद्र गौशाला में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक साथ कई गायों के मृत होने की जानकारी सामने आई। गौशाला परिसर में जमीन पर पड़ी गायों के शव देख स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। बताया जा रहा है कि मृत गायों की संख्या करीब 20 है। घटना के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया, लेकिन तब तक मामला तूल पकड़ चुका था।
भूख, प्यास और लापरवाही के आरोप
इस पूरे मामले में गौशाला प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि गायों को समय पर चारा और साफ पानी नहीं मिला। ठंड के मौसम में इलाज और देखभाल की व्यवस्था भी नाकाफी रही। आरोपों के मुताबिक लंबे समय से गौशाला की स्थिति खराब थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज किया, जिसका नतीजा इतनी बड़ी गोवंश क्षति के रूप में सामने आया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। नेताओं ने गौशाला के अंदर मृत पड़ी गायों के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे “प्रशासनिक असंवेदनशीलता” बताया। आरोप लगाया गया कि गोवंश संरक्षण केवल कागजों और भाषणों तक सीमित है, जमीनी स्तर पर हालात बदहाल हैं। साथ ही दोषियों पर एफआईआर और सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।
जांच और कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर मुख्यमंत्री को ई-मेल के जरिए शिकायत भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसमें स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और गौशालाओं की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते निगरानी होती, तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी। अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।