
Narendra Modi's life: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को अक्सर चाय बेचने वाले एक साधारण बालक से देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की गाथा के रूप में देखा जाता है। लेकिन इस सफर के पीछे एक ऐसे व्यक्तित्व का गहरा प्रभाव रहा, जिन्होंने मोदी की सोच, अनुशासन और संगठनात्मक क्षमता को आकार दिया। उनका नाम था लक्ष्मणराव इनामदार, जिन्हें संघ परिवार में "वकील साहेब" के नाम से जाना जाता था। 1960 के दशक में वडनगर में पहली बार नरेंद्र मोदी उनकी ओजस्वी वाणी से प्रभावित हुए और यही मुलाकात उनके जीवन की दिशा तय करने वाली साबित हुई।
आपातकाल के दौर में मिला नेतृत्व का सबक
1975 में जब आपातकाल लागू हुआ और संघ पर प्रतिबंध लगा, तो वकील साहेब और मोदी दोनों भूमिगत हो गए। इसी दौरान मोदी ने भेष बदलकर संगठन को जीवित रखने का कठिन कार्य किया। इस अनुभव ने उन्हें संघ का भरोसेमंद प्रचारक और आगे चलकर एक सशक्त संगठनकर्ता बना दिया। वकील साहेब न केवल संगठनात्मक रूप से बल्कि निजी जीवन में भी मोदी के लिए पिता तुल्य थे। उनके मार्गदर्शन में मोदी ने हेडगेवार भवन में रहकर अनुशासन, संवाद और सेवा का जीवन जीना सीखा।
शिक्षा और जीवन की अमूल्य धरोहर
वकील साहेब ने ही मोदी को पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा दी। उनके कहने पर मोदी ने राजनीति विज्ञान में बीए और बाद में एमए की पढ़ाई पूरी की, जिसने उनकी राजनीतिक सोच को गहराई दी। 1984 में कैंसर से जूझते हुए वकील साहेब का निधन हो गया, जिसने मोदी के जीवन में गहरा खालीपन छोड़ दिया। मोदी ने कई बार स्वीकारा है कि वे एकमात्र व्यक्ति थे जिनसे वह हर समस्या साझा कर सकते थे। आज भी मोदी उनकी डायरियों को अपनी सबसे कीमती धरोहर मानते हैं। वकील साहेब का अनुशासन, संगठन क्षमता और लोगों से संवाद का हुनर ही मोदी की कार्यशैली में स्पष्ट दिखाई देता है।