वाराणसी जीआरपी ने रविवार को अंतरराज्यीय कछुआ तस्कर गिरोह का खुलासा किया है। माघ मेले की चेकिंग के दौरान पांच तस्करों की गिरफ्तारी की गई है। दावा है कि यह सभी तस्कर पश्चिम बंगाल कछुआ तस्करी करने के लिए जा रहे थे। आरोपियों के पास से लगभग 365 प्रतिबंधित कछुओं की बरामदगी की गई है। इसके बाद इन पर कार्रवाई करते हुए जेल भेजा गया है। डिप्टी रेंजर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट राजकुमार गौतम ने बताया कि जीआरपी थाना ने जानकारी दी कि उन्होंने कछुए बरामद किये हैं। सूचना मिलते ही टीम थाने पहुंची। उन्होंने बताया कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत वह कछुआ संरक्षित है।
उन्होंने बताया कि यह अनुसूची-2 के पार्ट-बी का प्राणी है, जिसको अत्यंत संरक्षण प्रदान है, जहां यह कछुआ रहता है, जल संरक्षण करना, जल को स्वच्छ रखता है। यह हमारे लिए पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए बहुत ही लाभदायक प्राणी है। जो लोग इसे पकड़कर ले जाते हैं वे उसे अपने लाभ के लिए बेचते हैं। बेचने के कई कारण होते हैं।
पश्चिम बंगाल में बेचा जाता है
उन्होंने बताया कि बरामद किए गए कछुए को कुछ लोग भ्रामक तांत्रिक विद्या के लिए बेचते हैं, कुछ लोग पूजा-पाठ के लिए भी बेचते हैं। अधिकतर पश्चिम बंगाल में इसे बेचा जाता है। कुछ लोगों का कहना है कि इसका प्रयोग दवाओं में भी किया जाता है।
'एक कछुए की कीमत लगभग 25 हजार रुपये'
उन्होंने बताया कि इन लोगों की एक कछुआ बेचने से कम से कम बीस से पचीस हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है। आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके अंतर्गत सात साल की सजा का प्रावधान है। डिप्टी रेंजर ने बताया कि कछुओं का मेडिकल कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि सीएजीएम से अनुमति लेने के बाद बरामद कछुओं को गंगा नदी या तालाब या झील में छोड़ दिया जाएगा।
तस्करों के पास 13 बैग बरामद
कैंट रेलवे स्टेशन, जीआरपी प्रभारी राजोले नागर ने बताया कि, मौनी अमावस्या के दिन चेकिंग की जा रही थी. इस दौरान पांच लोग कछुओं की अवैध तस्करी करते हुए पाए गए, जो आसनसोल मेमू एक्सप्रेस से पश्चिम बंगाल ले जाने की फिराक में थे। इनके पास से 13 बैग बरामद हुए हैं, जिन्हें खोलकर देखा गया तो लगभग 365 इंडियन सॉफ्टशेल प्रजाति के कछुए बरामद किए गए हैं। इस मामले में पांच व्यक्ति गिरफ्तार किए गए हैं। इनकी कीमत मार्केट में लाखों रुपयों की है।