
देश का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। हमें मिशन गगनयान करना है। इसके बाद मिशन मून पर भी जाना है। भारत की स्पेस पॉलिसी तय है। इसी पर काम हो रहा है। 2035 तक भारत का स्पेस स्टेशन बनकर तैयार हो जाएगा। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने यह बातें राष्ट्रीय इन स्पेस मॉडल रॉकेट्री कैनसेट स्टूडेंट प्रतियोगिता 2024-25 के समापन के दौरान गुरुवार को कार्यक्रम में कही।
चार दिवसीय कार्यक्रम में 70 टीमों ने भाग लिया
कुशीनगर के नारायणी नदी किनारे स्थित तमकुही राज तहसील और संसदीय क्षेत्र देवरिया स्थित जंगल पट्टी गांव के जीरो बंधे पर आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रम में 70 टीमों ने भाग लिया। इसमें इसरो और इन स्पेस की अहम भूमिका रही। खराब मौसम और तकनीकी दिक्कतों की वजह से इस पूरे कार्यक्रम में केवल 40 टीमें ही भाग ले सकीं। 24 कैनसेंट मॉडल रॉकेट और 13 मॉडल रैकेट्री (छोटा रॉकेट) का प्रक्षेपण कराया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन बनाना है
एस्ट्रोनॉट शुभांशु के साथ इन-स्पेस के चेयरमैन डा. पवन गोयनका भी कार्यक्रम में पहुंचे। शुभांशु ने प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे छात्रों से बातचीत करते हुए कहा कि हमें मिशन गगनयान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन बनाना है। चांद पर जाना है, जिसका लक्ष्य 2035 तक का है। इस पर काम तेजी से चल रहा है.। इसरो पूरी मजबूती से इस दिशा में कार्य कर रहा है।
छोटे मॉडल रॉकेट्री के परीक्षण के लिए उपयुक्त
स्पेस के डायरेक्टर डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि कुशीनगर के इस इलाके में इतना बड़ा मैदानी क्षेत्र जहां पर आबादी भी कम रहती है। इसका होना छोटे मॉडल रॉकेट्री के परीक्षण के लिए उपयुक्त है। वहीं प्रतियोगिता के आखिरी दिन एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला भी कार्यक्रम में प्रतिभागी बच्चों के बीच पहुंचे। उन्होंने प्रतियोगिता को देश का भविष्य बताया। सांसद देवरिया शशांक मणि त्रिपाठी के प्रयासों से उनके संसदीय क्षेत्र में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने कहा कि ये लॉन्चिंग हमारे देश के भविष्य की झलक दिखा रही है। हमारा भविष्य बहुत ही उज्ज्वल है।