
Tiger Conservation Success: कान्हा और बांधवगढ़ जैसे रिजर्व बने अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आकर्षण, वन्यजीव संरक्षण में MP देश में अव्वल। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 2025 पर मध्यप्रदेश ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह देश का असली टाइगर स्टेट क्यों कहलाता है। 785 बाघों के साथ भारत में सबसे ज्यादा बाघों का घर बना मध्यप्रदेश न केवल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी है, बल्कि अब यह वन्यजीव पर्यटन का भी एक बड़ा केंद्र बन चुका है। राज्य के टाइगर रिजर्व में विदेशी पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को बल मिल रहा है।
बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए सुनियोजित प्रयास
प्रदेश सरकार द्वारा टाइगर हैबिटेट के सक्रिय प्रबंधन, जैविक दवाब मुक्त क्षेत्र बनाने और घास के मैदान विकसित करने जैसे कदमों ने बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की है। कोर एरिया से गांवों को विस्थापित कर वन्य प्राणियों के लिए स्वतंत्र आवास क्षेत्र उपलब्ध कराया गया है। कान्हा, पेंच, कूनो और सतपुड़ा जैसे रिजर्व इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
वन्यजीव पर्यटन में जबरदस्त उछाल
वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में 8 लाख से अधिक देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचे, जिनमें 85,000 से ज्यादा विदेशी पर्यटक शामिल रहे। अकेले बांधवगढ़, कान्हा और पन्ना रिजर्व में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा देखा गया, जिससे राज्य को करीब 61 करोड़ रुपये की आय हुई है।
कान्हा टाइगर रिजर्व बना सर्वश्रेष्ठ बाघ आवास
भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व को देश का सर्वश्रेष्ठ बाघ आवास क्षेत्र घोषित किया गया है। यहां शाकाहारी जीवों की प्रचुरता, जल स्रोत, घास के मैदान और बेहतर प्रबंधन के कारण बाघों को सुरक्षित और उपयुक्त वातावरण मिला है। यहां M-STriPES App का उपयोग और नियमित मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
बाघ संरक्षण में आधुनिक नवाचार
राज्य सरकार ने Gene Testing, Drone Squad और Rescue Centers जैसे अत्याधुनिक उपायों को अपनाया है। पन्ना टाइगर रिजर्व में ड्रोन स्क्वाड ने जंगल में आग और मानव-पशु संघर्ष को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उज्जैन और जबलपुर में रेस्क्यू सेंटर निर्माणाधीन हैं।
वन्यजीव अपराध नियंत्रण में कड़ी निगरानी
वन्यजीव अपराध नियंत्रण इकाई, ग्राम वन समितियों की भागीदारी और कैमरा ट्रैप व ड्रोन जैसी तकनीकों से राज्य में शिकार की घटनाओं में कमी आई है। वन विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाकर आमजन को वन्यजीवों के महत्व के प्रति सजग किया जा रहा है।