बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही हिंसक घटनाओं ने भारत में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। हाल ही में दो हिंदुओं की निर्मम हत्या के बाद विरोध अब सड़कों से आगे बढ़कर खेल जगत तक पहुँच गया है। मध्यप्रदेश के उज्जैन में संत समाज ने आईपीएल में बांग्लादेशी क्रिकेटरों के बहिष्कार की मांग करते हुए उग्र चेतावनी दी है, जिससे विवाद और गहराता नजर आ रहा है।
हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ संत समाज का आक्रोश
उज्जैन में साधु-संतों ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया है। संतों का कहना है कि बांग्लादेश में लगातार हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। इसी नाराजगी के चलते संत समाज ने क्रिकेट जैसे लोकप्रिय मंच पर विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है।
IPL में बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर रोक की मांग
संतों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब एक पड़ोसी देश में हिंदुओं की हत्या हो रही है, तब उसके खिलाड़ियों को भारत में करोड़ों रुपये देकर खिलाना अस्वीकार्य है। उनका कहना है कि आईपीएल में बांग्लादेशी क्रिकेटरों को खेलने से रोका जाना चाहिए। संत समाज ने इसे सिर्फ खेल का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा विषय बताया।
पिच उखाड़ने तक की चेतावनी
विरोध के दौरान संतों ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे मैच नहीं होने देंगे। संतों ने ऐलान किया कि जरूरत पड़ी तो नागा साधु खुद मैदान में उतरकर पिच उखाड़ देंगे। उन्होंने पुराने उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि यह आंदोलन सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि निर्णायक कदम होगा।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
संत समाज ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से भी इस पूरे मामले में दखल देने की मांग की है। उनका कहना है कि देश में क्रिकेट प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, फिर बांग्लादेशी खिलाड़ियों को मौका देने का कोई औचित्य नहीं बनता। संतों ने यह भी मांग की कि बांग्लादेश के साथ किसी भी स्तर पर क्रिकेट संबंधों पर पुनर्विचार किया जाए।
विरोध और तेज होने के संकेत
अखिल भारतीय संत समिति के बैनर तले संतों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र हो सकता है। आईपीएल 2026 में बांग्लादेशी खिलाड़ियों की संभावित भागीदारी की खबरों के बाद विरोध और तेज होने के आसार हैं। संतों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ खेल नहीं, बल्कि हिंदुओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ी है।