आईपीएल 2026 अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और 24 मई को लीग चरण खत्म होने वाला है। इसके बाद प्लेऑफ और फाइनल मुकाबलों का रोमांच शुरू होगा, लेकिन इससे पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। नियम के अनुसार पिछले सीजन की विजेता टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के होमग्राउंड पर फाइनल होना चाहिए। इस हिसाब से बेंगलुरु का एम चिन्नास्वामी स्टेडियम मेजबानी के लिए तय था, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
विधायकों की मांग से बढ़ा विवाद
पूरे विवाद की जड़ कर्नाटक की राजनीति से जुड़ी है। हुनगुंड सीट से विधायक विजयानंद कशप्पानवर ने मांग रखी कि हर विधायक को आईपीएल मैच के लिए कम से कम 5 टिकट दिए जाएं। उनका तर्क था कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें वीआईपी सुविधा मिलनी चाहिए। इस मांग को कई अन्य विधायकों का भी समर्थन मिला, जिससे मामला और गरमा गया। हालांकि बाद में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने समझौते के तहत हर विधायक को 3 टिकट देने का फैसला किया, लेकिन विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ।
टिकट नियम बना नई परेशानी
मामले को नियंत्रित करने के लिए गृह मंत्री जी परमेश्वरा ने स्पष्ट किया कि दिए गए टिकटों का इस्तेमाल सिर्फ विधायक और उनके परिवार के लोग ही कर सकेंगे। इसके बावजूद टिकट वितरण को लेकर असंतोष बना हुआ है। यही वजह है कि प्रशासनिक स्तर पर आयोजन को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, अगर यह विवाद समय रहते नहीं सुलझा, तो फाइनल मुकाबला बेंगलुरु से हटाकर किसी दूसरे शहर में शिफ्ट किया जा सकता है।
प्लेऑफ वेन्यू पर भी सस्पेंस
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया पहले ही कह चुके हैं कि प्लेऑफ शेड्यूल जल्द घोषित होगा, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार प्लेऑफ मुकाबले पंजाब और कर्नाटक में कराए जा सकते हैं, लेकिन फाइनल का स्थान अभी तय नहीं है। यह स्थिति टूर्नामेंट के इतिहास में एक असामान्य मोड़ मानी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर इतने बड़े आयोजन के लिए पहले से स्पष्ट योजना होती है।
इसे भी पढ़ें : टीम इंडिया के भरोसेमंद गेंदबाज पर सवाल, क्या थकान बन रही सबसे बड़ी दुश्मन?
क्रिकेट पर सियासत भारी?
आईपीएल जैसे बड़े मंच पर इस तरह का विवाद कई सवाल खड़े करता है। क्या सियासी दबाव क्रिकेट के फैसलों को प्रभावित कर रहा है? क्या फैंस को उनके शहर में फाइनल देखने का मौका नहीं मिलेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीसीसीआई क्या फैसला लेता है और क्या बेंगलुरु अपना फाइनल बचा पाएगा या नहीं।