IPS Vishwas Nangre Patil: महाराष्ट्र के नागपुर के नए पुलिस आयुक्त और 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान अपनी बहादुरी के लिए चर्चित आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए भाषण को लेकर राजनीतिक विवादों में घिर गए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उन्होंने आरएसएस और उसके संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रशंसा कर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों का उल्लंघन किया है। इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
कांग्रेस ने उठाए आचरण नियमों पर सवाल
कांग्रेस का कहना है कि किसी भी आईपीएस अधिकारी को राजनीतिक या वैचारिक संगठन के कार्यक्रम में शामिल होने से पहले सरकार की अनुमति लेना आवश्यक होता है। पार्टी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा है कि क्या विश्वास नांगरे पाटिल ने कार्यक्रम में शामिल होने से पहले अनुमति ली थी। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि यदि अनुमति नहीं ली गई, तो क्या सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी।
राजनीतिक तटस्थता पर छिड़ी बहस
कांग्रेस का आरोप है कि अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम अधिकारियों को राजनीतिक रूप से तटस्थ रहने और किसी विचारधारा विशेष से सार्वजनिक रूप से जुड़ने से रोकते हैं। पार्टी का कहना है कि आरएसएस के मंच से उसके संस्थापक की प्रशंसा करना इन नियमों की भावना के विपरीत हो सकता है। कांग्रेस ने इसे केवल एक अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि सिविल सेवा की निष्पक्षता और जनता के विश्वास से जुड़ा मुद्दा बताया है।
26/11 के दौरान दिखाई थी बहादुरी
विश्वास नांगरे पाटिल महाराष्ट्र कैडर के 1997 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान ताज महल पैलेस होटल में आतंकवादियों का सामना करने और कई लोगों की जान बचाने के लिए जाना जाता है। उस समय वे दक्षिण मुंबई के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) थे और सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले अधिकारियों में शामिल थे। उनकी बहादुरी की देशभर में सराहना हुई थी।
लेखक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में पहचान
विश्वास नांगरे पाटिल अपनी चर्चित पुस्तक 'मन में है विश्वास' के लेखक भी हैं, जिसे व्यापक लोकप्रियता मिली। हाल ही में उन्हें नागपुर का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। फिलहाल उनके भाषण को लेकर उठे विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं, जबकि सरकार की ओर से इस मामले में अभी कोई आधिकारिक कार्रवाई या टिप्पणी सामने नहीं आई है। में हुए आतंकी हमले के दौरान अपनी असाधारण बहादुरी के लिए जाने जाते हैं. जोन-1 (दक्षिण मुंबई) के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस के तौर पर, वे उन शुरुआती अधिकारियों में से थे जो आतंकियों से घिरे ताज महल पैलेस होटल पहुंचे थे.