कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने बिहार के जोकीहाट में आयोजित चुनावी सभा में ऐसा भाषण दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी. इकरा हसन ने मंच से साफ कहा कि देश में असली समस्या हिंदू-मुस्लिम नहीं, बल्कि नफरत की राजनीति है, जिसे सत्ता में बैठे लोग बढ़ावा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब तक बीजेपी सत्ता में रहेगी, वह समाज को आपस में बांटने की कोशिश करती रहेगी. उन्होंने इसे सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि देश की एकता और संविधान की लड़ाई बताया. उनका ये सधा हुआ लेकिन तीखा बयान कई दिग्गज नेताओं तक को सोचने पर मजबूर कर गया.
'हिंदू-मुस्लिम की समस्या अलग नहीं'
इकरा हसन ने भीड़ से साफ कहा कि हिंदू हों या मुस्लिम, आम लोगों की समस्याएं एक जैसी बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य है उन्होंने कहा कि बीजेपी इन्हीं असली मुद्दों से ध्यान हटाकर धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाती है. इकरा ने यूपी का उदाहरण देते हुए कहा कि हमने वहां यह सब भुगता है, बिहार को उस स्थिति में मत पहुंचने दीजिए. उन्होंने जनता से अपील की कि वोट का बंटवारा न करें, क्योंकि इससे सिर्फ नफरत की राजनीति करने वालों को फायदा होगा.
महागठबंधन को बताया संविधान की ढाल
इकरा हसन ने राजद प्रत्याशी शाहनवाज आलम के समर्थन में कहा कि यह चुनाव किसी एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि विचारधारा का चुनाव है. उन्होंने कहा कि राजद, कांग्रेस, सपा और अन्य सेक्यूलर पार्टियों का महागठबंधन सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए बना है. उन्होंने कहा कि हर प्रदेश में महागठबंधन की सरकार बनाना जरूरी है, तभी हालात बदलेंगे, वरना देश बार-बार वही दर्द झेलेगा.
इकरा की सीधी चेतावनी, दिग्गज भी हैरान
इकरा हसन ने भाषण के अंत में लोगों को चेतावनी के लहजे में कहा यह आखिरी मौका है. अगर इस बार भी चूक गए, तो बीजेपी बार-बार प्रताड़ित करेगी. उन्होंने लोगों से नफरत फैलाने वालों के खिलाफ एकजुट होकर वोट करने की अपील की. उनके इस बेबाक बयान ने सियासी हलकों में बड़ी हलचल मचा दी। यहां तक कि AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी तक इस तेवर और भाषा से दंग रह गए.