ईरान और अमेरिका के बीच शुक्रवार को ओमान में वार्ता होने की उम्मीद है, लेकिन अब यह वार्ता रद्द कर दी गई है। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान ने पहले से बनी सहमतियों से पीछे हटते हुए बातचीत की जगह और प्रारूप बदलने की मांग की, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। इस बीच, अरब सागर में अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया, जिससे तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका का दावा है कि ईरानी ड्रोन उसके विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन की ओर खतरनाक ढंग से आगे बढ़ रहा था।
ईरान और अमेरिका दोनों के हित में नहीं
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि व्यापक संघर्ष ईरान और अमेरिका दोनों के हित में नहीं होगा। उन्होंने मिस्र के राष्ट्रपति से बातचीत में कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव में नहीं आएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कई कारण हैं
1.2015 में ईरान और P5+1 देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, चीन और रूस) के बीच हुआ परमाणु समझौता (JCPOA) एक महत्वपूर्ण कारण है। 2018 में अमेरिका ने इस समझौते से बाहर निकलने का फैसला किया और ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए।
2. ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर अमेरिका को संदेह है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है।
3. ईरान और अमेरिका के बीच क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर भी तनाव है। ईरान सीरिया, लेबनान और यमन में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका पसंद नहीं करता।
4. ईरान के पास अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को लेकर भी तनाव है। अमेरिका ने ईरान के पास अपने सैन्य बलों को तैनात किया है, जिसे ईरान अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
भारत पर कई तरह से प्रभाव पड़ सकता है
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का भारत पर कई तरह से प्रभाव पड़ सकता है। सबसे पहले, ऊर्जा सुरक्षा पर इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि ईरान भारत का एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है। अगर तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।