मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष अब नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने तुर्की स्थित NATO के अहम सैन्य ठिकाने इंसिरलिक एयर बेस को निशाना बनाया है। इस बेस पर बड़ी संख्या में परमाणु बम मौजूद होने की आशंका जताई जाती रही है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। हमले के बाद बेस और आसपास के इलाके में सायरन बजने और सुरक्षा अलर्ट जारी होने की खबरों ने युद्ध के और फैलने का खतरा बढ़ा दिया है।
तुर्की के इंसिरलिक एयर बेस को बनाया निशाना
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने तुर्की के दक्षिणी हिस्से में स्थित इंसिरलिक एयर बेस को टारगेट किया। यह बेस NATO के लिए बेहद रणनीतिक माना जाता है और यहां कई देशों की सैन्य गतिविधियां संचालित होती हैं। हमले के बाद इलाके में तेज धमाकों की आवाजें और सायरन सुनाई दिए, जिसके बाद पूरे सैन्य परिसर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया।
परमाणु हथियारों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता
इंसिरलिक एयर बेस को लेकर लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि यहां अमेरिका के कई परमाणु बम सुरक्षित रखे गए हैं। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, NATO की परमाणु साझेदारी व्यवस्था के तहत इस बेस पर करीब 50 परमाणु बम होने का अनुमान लगाया जाता है। ऐसे में इस ठिकाने पर हमला होने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हमले के बाद बेस और शहर में रेड अलर्ट
हमले के बाद बेस परिसर में सायरन बजने लगे और सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल रेड अलर्ट जारी कर दिया। जानकारी के मुताबिक, देर रात करीब साढ़े तीन बजे अलार्म बजा और कई मिनट तक चेतावनी सायरन सुनाई देते रहे। आसपास के शहरों में भी दमकल और सुरक्षा वाहनों की आवाजाही बढ़ गई, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
पहले भी तुर्की के हवाई क्षेत्र में रोकी गई थी मिसाइल
यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा हो। इससे पहले भी ईरान की एक मिसाइल तुर्की के हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले ही रक्षा प्रणाली द्वारा मार गिराई गई थी। उस घटना के बाद से ही क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया था। ताजा हमले ने यह संकेत दिया है कि युद्ध का दायरा धीरे-धीरे और बढ़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में और भड़क सकती है जंग
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के सैन्य ठिकानों को लगातार निशाना बनाया जाता रहा तो मिडिल ईस्ट का संघर्ष और अधिक व्यापक हो सकता है। पहले से ही कई देशों के सैन्य ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में क्षेत्रीय संघर्ष के वैश्विक सुरक्षा संकट में बदलने की आशंका भी तेजी से बढ़ रही है।