सीजफायर पर सहमति के बाद ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) ने कहा कि "अमेरिका को ऐतिहासिक हार मिली और वह ईरान की शर्तों पर बातचीत करने को मजबूर हुआ"। ईरान ने इसे "इस्लामिक राष्ट्र की बड़ी जीत" बताया। ईरान ने दावा किया कि "अमेरिका और उसके सहयोगी भविष्य में ईरान पर कोई सैन्य हमला न करें" - यही उसकी सबसे बड़ी शर्त थी।
रक्षात्मक अभियान बंद कर देंगी सेनाएं
साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बरकरार रखा है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा सीजफायर के बाद अराघची के कई बयान आए हैं, जो हालात के हिसाब से बदले हैं। अराघची ने कहा, "अगर ईरान पर हमले रोक दिए जाते हैं, तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं अपने रक्षात्मक अभियान बंद कर देंगी।" साथ ही 2 हफ्ते के लिए होर्मुज से सुरक्षित आवागमन की बात मानी। उन्होंने पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का "क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के अथक प्रयासों के लिए आभार" जताया। मार्च में अराघची ने कहा था - "हमने कभी सीजफायर नहीं मांगा और न ही बातचीत की मांग की है।
पुख्ता गारंटी दी जाए
ईरान तब तक अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा, जब तक राष्ट्रपति ट्रंप इस बात को नहीं मान लेते कि यह एक गैर-कानूनी युद्ध है"। अराघची बोले कि "युद्ध का अंत तभी संभव है जब इस बात की पुख्ता गारंटी दी जाए कि हमले दोबारा नहीं दोहराए जाएंगे"। साथ ही नुकसान के लिए हर्जाने की मांग भी की।
अंतरराष्ट्रीय गारंटी 100% भरोसेमंद नहीं होतीं
IRGC ने कहा कि "भले ही दो सप्ताह का सीजफायर हुआ है, लेकिन हमारा हाथ ट्रिगर पर ही है। दुश्मन हमेशा धोखेबाज रहा है, हमें उसके वादों पर कोई भरोसा नहीं है"। "वर्तमान में हमारी नीति प्रतिरोध जारी रखने की है। अभी कोई बातचीत नहीं हो रही है। अंतरराष्ट्रीय गारंटी 100% भरोसेमंद नहीं होतीं"। मुख्य बातईरान सीजफायर को "अमेरिका की हार और अपनी जीत" बता रहा है, लेकिन साथ ही कह रहा है कि ये सिर्फ 2 हफ्ते की मोहलत है।