मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है, जहां डोनाल्ड ट्रंप की सख्त डेडलाइन ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है। होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने को लेकर दी गई चेतावनी के बीच ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच लगातार हमले जारी हैं। सवाल यही है—क्या दुनिया एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रही है या फिर आखिरी वक्त में कूटनीति बाज़ी मार लेगी? इस अनिश्चितता ने वैश्विक राजनीति को हिला दिया है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर होर्मुज़ स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। यह बयान सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि सीधे सैन्य कार्रवाई का संकेत माना जा रहा है। ट्रंप का रुख अब दबाव की राजनीति से आगे बढ़कर निर्णायक एक्शन की ओर दिख रहा है।
ईरान का सख्त रुख और पलटवार
ईरान ने भी झुकने के संकेत नहीं दिए हैं। संसद स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ ने ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान का कहना है कि वह केवल स्थायी समाधान चाहता है, अस्थायी सीजफायर नहीं। ऐसे में यह टकराव और गहराता नजर आ रहा है।
शहरों पर हमले, आम लोगों पर असर
ईरान के कई बड़े शहरों—तेहरान, शिराज़, इस्फ़हान और बंदर अब्बास—में हमले हुए हैं। इन हमलों में कई निर्दोष लोगों की जान गई, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। रिहायशी इलाकों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
सैन्य ताकत का खुला प्रदर्शन
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 13,000 से ज्यादा टारगेट्स पर हमले का दावा किया है। ऑपरेशन में आधुनिक फाइटर जेट, बॉम्बर और परमाणु शक्ति से लैस युद्धपोत शामिल हैं। यह साफ संकेत है कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो यह संघर्ष एक बड़े युद्ध में बदल सकता है।
सीजफायर या युद्ध—दुनिया की नजरें टिकीं
संयुक्त राष्ट्र में भी इस संकट को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। खाड़ी देशों की भूमिका भी अहम हो गई है। अब सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान अगला कदम क्या उठाता है—समझौता या संघर्ष।