ईरान में पिछले साल के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक खामेनेई शासन की कार्रवाई में अब तक 6,126 लोगों की जान जा चुकी है। हजारों लोग अभी भी लापता हैं, जिनके बारे में आशंका जताई जा रही है कि वे भी मारे जा चुके हैं। सड़कों पर उतरे आम लोग आज़ादी और अधिकारों की मांग कर रहे थे, लेकिन जवाब में गोलियां और दमन मिला।
कौन थीं डायना बहादोर
इन प्रदर्शनों में मारी गई एक पहचान बन चुकी थीं 19 साल की डायना बहादोर। ईरान में उन्हें बेबी राइडर के नाम से जाना जाता था। डायना गोनबद ए कावुस की रहने वाली थीं और सोशल मीडिया पर मोटरसाइकिल राइडिंग के वीडियो के लिए मशहूर थीं। मिड वेट बाइकों पर उनकी बेखौफ राइडिंग और आज़ादी भरे अंदाज ने उन्हें युवाओं की आवाज बना दिया था।
प्रदर्शन में गई और लौटकर नहीं आई
8 जनवरी 2026 की रात डायना गोरगान शहर में चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। सुरक्षा बलों ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया और इसी दौरान एक जिंदा गोली डायना को लगी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। परिवार ने दो दिन तक उनकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में अधिकारियों ने उनका शव सौंपा।
मौत को हादसा बताने का आरोप
परिवार का आरोप है कि ईरानी प्रशासन ने डायना की हत्या को सड़क हादसा बताने की कोशिश की। इतना ही नहीं, डायना के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी कब्जा कर लिया गया और परिवार को चुप रहने की धमकियां दी गईं। यह तरीका ईरान में पहले भी देखा गया है, जहां प्रदर्शनकारियों की मौतों को छिपाने की कोशिश की जाती रही है।
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वेस्टर्न कपड़े और खुली सोच बनी वजह
डायना वेस्टर्न कपड़े पहनकर, खुले बालों में हेलमेट लगाकर बाइक चलाती थीं। उनके वीडियो ईरान की सख्त धार्मिक व्यवस्था के खिलाफ एक खुली चुनौती थे। जिस देश में हिजाब को लेकर महसा अमीनी की जान ले ली गई, वहां डायना का ऐसा जीवन जीना खुद में एक क्रांति था। उन्होंने आज़ादी चुनी और इसकी कीमत अपनी जान से चुकाई।
अमेरिका की चेतावनी और युद्ध का खतरा
इन मौतों के बीच ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ रहा है। अमेरिकी नौसेना का यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों की हत्या या फांसी जारी रखी तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा। हालात ऐसे हैं कि ईरान में आज़ादी की लड़ाई अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक टकराव की ओर बढ़ती दिख रही है।