सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 800 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 250 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। शुरुआत से ही बाजार में बेचैनी दिखाई दी और ज्यादातर शेयर लाल निशान में कारोबार करते रहे।
सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव
बीएसई का सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 74,243 अंकों के मुकाबले करीब 822 अंक गिरकर 73,421 पर खुला। कुछ ही देर बाद यह और फिसलकर 73,318 तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 23,366 के स्तर से गिरकर 23,080 के आसपास खुला। हालांकि बाद में थोड़ी रिकवरी जरूर देखने को मिली, लेकिन बाजार में कमजोरी बनी रही। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों का भरोसा डगमगाता नजर आया।
बड़े शेयरों में बिकवाली
बाजार की गिरावट का असर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी साफ दिखाई दिया। रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे बड़े शेयर दबाव में रहे। कई प्रमुख कंपनियों के शेयर 1 से 3 फीसदी तक टूट गए। मिडकैप शेयरों में भी बिकवाली का माहौल देखने को मिला। निवेशक जोखिम लेने से बचते दिखाई दिए और सुरक्षित विकल्पों की तरफ रुख करते नजर आए।
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जंग ने बढ़ाई चिंता
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता सैन्य तनाव माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच लगातार हमलों की खबरों ने वैश्विक बाजारों का माहौल बिगाड़ दिया है। निवेशकों को डर है कि अगर यह तनाव और बढ़ा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया भर के बाजारों में दबाव देखने को मिल रहा है।
कच्चे तेल ने बढ़ाई मुश्किल
तनाव बढ़ने के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 94 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए यह चिंता की बात है। महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और कंपनियों की लागत पर भी असर डाल सकता है।
दुनिया भर के बाजारों में असर
भारतीय बाजार अकेला नहीं है। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग समेत कई एशियाई बाजारों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जापान का प्रमुख सूचकांक हजारों अंक नीचे कारोबार करता दिखा, जबकि अन्य एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता बनी रह सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर जंग से जुड़ी हर नई खबर और कच्चे तेल की चाल पर टिकी हुई है।