इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शांति वार्ता के दौरान ईरान के दो वरिष्ठ नेताओं पर हमले की आशंका जताई गई थी। बताया गया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को संभावित निशाना बनाए जाने की सूचना मिलने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई। दावा है कि इस घटनाक्रम का असर शांति प्रयासों पर भी पड़ सकता था।
शांति वार्ता के दौरान बढ़ी सुरक्षा चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, जब ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम शांति समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी, उसी दौरान ईरान के प्रमुख वार्ताकारों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई। दावा किया गया है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को संभावित हमले का खतरा था। आशंका यह भी जताई गई कि यदि इन नेताओं को कोई नुकसान पहुंचता, तो चल रही वार्ता पूरी तरह प्रभावित हो सकती थी।
दूसरे देशों के जरिए पहुंचाया गया सुरक्षा संदेश
दावे के अनुसार, संभावित खतरे को देखते हुए कुछ क्षेत्रीय देशों के माध्यम से ईरान को सतर्क रहने का संदेश भेजा गया। माना गया कि वार्ता में शामिल प्रमुख नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी था, क्योंकि किसी भी अप्रिय घटना से तनाव और बढ़ सकता था। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए थीं।
ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने का भी दावा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की रणनीति पहले से चर्चा में रही है। इसमें कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल होने का दावा किया गया है। बताया गया कि सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के साथ-साथ राजनीतिक नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश भी रणनीति का हिस्सा मानी गई।
अराघची और गालिबाफ की भूमिका थी अहम
बताया गया है कि अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ युद्धविराम और स्थायी शांति को लेकर चल रही बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। इसी वजह से उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। दावा है कि वार्ता प्रक्रिया को सुरक्षित बनाए रखने के लिए संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
पाकिस्तान यात्रा और वापसी के दौरान भी अलर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, जब ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की यात्रा पर गया था, तब भी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर थीं। दावा किया गया कि प्रतिनिधिमंडल के विमान को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई और वापसी के दौरान संभावित हमले की खुफिया सूचना भी मिली। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।