मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लगभग दस दिन हो चुके हैं और इसका असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर साल 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ी अनिश्चितता है, जिससे दुनिया भर के तेल बाजार में हलचल मच गई है।
होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर इस रास्ते पर बाधा आती है तो इसका असर कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी वजह से तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है और कई देश अपने ऊर्जा भंडार और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सतर्क हो गए हैं।
भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर
भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। हालांकि अभी तक देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार और रिफाइनिंग कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश भी की जा रही है। हालांकि यदि युद्ध लंबा चलता है तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
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पाकिस्तान में बढ़े ईंधन के दाम
पड़ोसी देश पाकिस्तान में वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे दिखाई देने लगा है। वहां पेट्रोल की कीमत करीब 336 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि हाई स्पीड डीजल का दाम लगभग 321 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर बताया जा रहा है। बढ़ती कीमतों और आयात पर निर्भरता के कारण पाकिस्तान के कई इलाकों में पेट्रोल और डीजल की कमी की खबरें भी सामने आ रही हैं।
पंपों पर लंबी कतारें और बढ़ी परेशानी
पाकिस्तान के कई शहरों में हालात ऐसे हो गए हैं कि जैसे ही किसी पेट्रोल पंप के खुलने की सूचना मिलती है, वहां गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कुछ पंप ईंधन की कमी के कारण बंद भी पड़े हैं, जबकि खुले पंपों पर लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
बांग्लादेश में लागू हुई राशनिंग
बांग्लादेश में भी कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर दिखने लगा है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए वहां की सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर राशनिंग सिस्टम लागू कर दिया है। इसके तहत लोगों को तय सीमा के अनुसार ही ईंधन दिया जा रहा है, ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके और अचानक कमी की स्थिति से बचा जा सके।