मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में करीब 15 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करते हैं, इस संकट से सीधे प्रभावित हो सकते हैं। अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो किचन गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल, हवाई किराया और EMI तक महंगी हो सकती है।
क्रूड ऑयल की सप्लाई पर संकट
ईरान-इजरायल युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है, जिसका असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ रहा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत इसी रास्ते से प्राप्त करता है। यदि इस मार्ग पर संकट बढ़ता है तो भारत में कच्चे तेल की उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
किचन बजट पर पहला असर
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सबसे पहला असर घर के किचन पर दिखाई देता है। तेल से ही पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसे ईंधन बनते हैं। हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी भी इसी दबाव का संकेत मानी जा रही है। गैस महंगी होने से परिवारों का मासिक बजट बिगड़ सकता है और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ सकता है।
ट्रांसपोर्ट महंगा, बढ़ सकती है महंगाई
अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं तो परिवहन लागत भी बढ़ जाती है। इसका सीधा असर बाजार में मिलने वाली वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। सब्जियों, फल, अनाज और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई महंगी होने से इनके दाम भी बढ़ सकते हैं। यानी आम लोगों को रोजमर्रा की चीजों के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
विदेशी सामान और हवाई सफर होगा महंगा
युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, जिससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है। भारत तेल, सोना और कई अन्य वस्तुएं विदेश से आयात करता है, जिनका भुगतान डॉलर में होता है। ऐसे में आयात लागत बढ़ने से सोना, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य विदेशी उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसके साथ ही जेट फ्यूल महंगा होने से एयरलाइंस हवाई किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं।
बढ़ सकती है लोन की EMI
तेल की कीमतों में तेजी से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है। इससे आम लोगों के मासिक खर्च में और बढ़ोतरी होगी और नए लोन लेना भी महंगा हो सकता है।