पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक नई अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। लगातार हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास अभी भी बड़ी संख्या में मिसाइल लॉन्चर और हजारों ड्रोन सक्रिय हैं। यह स्थिति अमेरिका और उसके सहयोगियों के दावों से अलग तस्वीर पेश करती है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी करती है।
आधी ताकत अब भी बरकरार
खुफिया आकलन के अनुसार, ईरान के लगभग 50% मिसाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं। इसके साथ ही हजारों ड्रोन भी सक्रिय स्थिति में मौजूद हैं। हालांकि हमलों से कुछ सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन पूरी क्षमता को खत्म नहीं किया जा सका है। यह दर्शाता है कि ईरान की सैन्य संरचना अपेक्षा से अधिक मजबूत और लचीली है।
बयानबाजी बनाम हकीकत
अमेरिकी नेतृत्व की ओर से बार-बार यह दावा किया गया कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है। लेकिन खुफिया रिपोर्ट इन दावों से मेल नहीं खाती। रिपोर्ट बताती है कि जमीनी स्तर पर ईरान अब भी जवाबी कार्रवाई करने की स्थिति में है, जिससे सरकारी बयानों और वास्तविक हालात के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।
हमलों का असर, लेकिन पूरी सफलता नहीं
अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा हजारों टारगेट पर हमले किए गए, जिससे ईरान को कुछ हद तक नुकसान जरूर हुआ है। मिसाइल लॉन्चरों की संख्या में कमी आई है और हमलों की तीव्रता भी घटी है। इसके बावजूद, कई महत्वपूर्ण सैन्य संसाधन अब भी सुरक्षित हैं, जो भविष्य में खतरा बन सकते हैं।
टनल और मोबाइल लॉन्चर बने बड़ी चुनौती
ईरान की रणनीति में भूमिगत टनल और मोबाइल लॉन्च सिस्टम अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनकी वजह से मिसाइल सिस्टम को पूरी तरह खत्म करना बेहद मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये छिपे हुए प्लेटफॉर्म ईरान की सैन्य ताकत को लंबे समय तक बनाए रखने में सक्षम हैं।
होर्मुज क्षेत्र में बढ़ा खतरा
ईरान की बची हुई सैन्य ताकत खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। यहां से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले की आशंका बनी हुई है। छोटे नौसैनिक प्लेटफॉर्म और ड्रोन इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है।