मिडिल ईस्ट में बढ़ते टकराव के बाद एक बार फिर दुनिया की नजर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर टिक गई है। इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान के पास पहले से परमाणु बम है या वह सिर्फ उसकी तैयारी की क्षमता रखता है।
कब शुरू हुआ परमाणु कार्यक्रम
ईरान कई दशकों से अपने परमाणु कार्यक्रम पर काम कर रहा है। तेहरान का कहना है कि उसका मकसद ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा जैसे शांतिपूर्ण उपयोग हैं। लेकिन पश्चिमी देश लंबे समय से इस पर शक जताते रहे हैं। इसी वजह से ईरान पर कई बार पाबंदियां भी लगाई गईं।
खुफिया एजेंसियों का आकलन
अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की पिछली रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान ने 2003 के बाद अपने संगठित परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोक दिया था। कुछ आकलनों के मुताबिक फिलहाल ईरान सक्रिय रूप से परमाणु बम बना रहा है, इसका कोई पक्का सबूत नहीं है। हालांकि तकनीकी क्षमता को लेकर चिंता जरूर जताई गई है।
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यूरेनियम संवर्धन का मुद्दा
परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम को करीब 90 प्रतिशत तक संवर्धित करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों के मुताबिक ईरान ने 60 प्रतिशत तक संवर्धन किया है। यह स्तर हथियार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आगे बढ़ाया जाए तो तकनीकी रूप से यह संभव हो सकता है।
क्षमता और हथियार में फर्क
किसी देश के पास संवर्धित यूरेनियम होना और असली परमाणु बम तैयार कर लेना, दोनों अलग बातें हैं। हथियार तैयार करने के लिए डिजाइन, परीक्षण और कई जटिल चरण पूरे करने पड़ते हैं। फिलहाल सार्वजनिक रिपोर्टों में ईरान के पास तैयार परमाणु बम होने की पुष्टि नहीं है।
दुनिया की नजर आगे पर
मौजूदा हालात में यह कहना सही नहीं होगा कि ईरान के पास परमाणु हथियार है। लेकिन उसकी तकनीकी तैयारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय सतर्क है। अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो परमाणु मुद्दा फिर वैश्विक राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।