ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल टैक्स लगाने की योजना बना रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। ईरान का कहना है कि वह इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, इसलिए जहाजों से शुल्क लेना उचित है। डेनमार्क ने भी 1429 से 1857 तक ओरेसुंड जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से साउंड ड्यूज नामक टोल टैक्स वसूला था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार, होर्मुज जैसे जलडमरूमध्य पर एकतरफा टैक्स लगाना अवैध है।
ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल टैक्स लगाने के फैसले से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे महंगाई बढ़ने और विकास दर घटने का खतरा है।
संभावित प्रभाव:
ऊर्जा कीमतों में वृद्धि: होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर टोल टैक्स लगाने से ऊर्जा कीमतें बढ़ सकती हैं।
महंगाई में वृद्धि: ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ सकती है।
विकास दर में कमी: महंगाई और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से विकास दर घट सकती है।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव: होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल टैक्स लगाने से वैश्विक व्यापार पर भी प्रभाव पड़ सकता है
भारत की अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है
ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल टैक्स लगाने के फैसले से भारत की अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इस जलमार्ग से आयात करता है, और टोल टैक्स लगाने से ऊर्जा कीमतें बढ़ सकती हैं
ऊर्जा कीमतों में वृद्धि: टोल टैक्स लगाने से ऊर्जा कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत की ऊर्जा आयात बिल बढ़ सकती है।
महंगाई में वृद्धि: ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ सकता है।
विकास दर में कमी: महंगाई और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से विकास दर घट सकती है, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है। ईरान ने भारत को उन 'मित्र देशों' की सूची में रखा है जिन्हें इस रास्ते से गुजरने के लिए विशेष राहत दी जाएगी, जिससे भारतीय जहाजों को कुछ राहत मिल सकती है।