ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। एक ओर जहां सड़कों पर हिंसा, इंटरनेट बंदी और फांसी की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की सैन्य गतिविधियों और हवाई क्षेत्र बंद होने से हालात और गंभीर हो गए हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव न सिर्फ ईरान बल्कि पूरी दुनिया की नजरों में है।
हवाई क्षेत्र बंद, भारतीय उड़ानों पर सीधा असर
ईरान ने राजधानी तेहरान के आसपास सुरक्षा कारणों से अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह फैसला NOTAM के तहत अगले आदेश तक लागू किया गया है। इसके चलते भारत से यूरोप और खाड़ी देशों की ओर जाने वाली कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे यात्रियों को देरी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। एयरलाइनों ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपडेट चेक करने की सलाह दी है।
अमेरिकी नौसेना की बढ़ती मौजूदगी से बढ़ा डर
मौजूदा हालात के बीच अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। इसमें एक एयरक्राफ्ट कैरियर और उसका स्ट्राइक ग्रुप शामिल है। इस सैन्य हलचल को ईरान-अमेरिका तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व ने साफ किया है कि वह ईरान की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, जिससे क्षेत्र में संभावित टकराव की आशंका और गहरा गई है।
इंटरनेट बंदी और हिंसा, भारतीय छात्रों की चिंता
ईरान में बार-बार इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और हिंसक प्रदर्शनों के चलते वहां रह रहे विदेशी नागरिकों से संपर्क मुश्किल हो गया है। खास तौर पर ईरान में पढ़ाई कर रहे हजारों भारतीय छात्रों, जिनमें बड़ी संख्या मेडिकल छात्रों की है, को लेकर उनके परिजन चिंतित हैं। कई इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रेजा पहलवी का संदेश, सत्ता परिवर्तन की उम्मीद
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने एक वीडियो संदेश जारी कर मौजूदा शासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ईरान की असली पहचान शांति, समृद्धि और सम्मान से जुड़ी है, न कि हिंसा और दमन से। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था के पतन के बाद ईरान एक नए और लोकतांत्रिक भविष्य की ओर बढ़ेगा।
फांसी पर सफाई और मानवाधिकारों पर सवाल
प्रदर्शनकारियों को फांसी दिए जाने की खबरों के बीच ईरानी विदेश मंत्री ने इन दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसी को फांसी देने की कोई योजना नहीं है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कई प्रदर्शनकारियों की जान अब भी खतरे में है और हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।