Iran-US War : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए सात शर्तें सामने रखी हैं। ईरान के सुरक्षा परिषद सचिव मोहसिन रेजाई के मुताबिक, ये शर्तें कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई गई हैं और अब तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। रेजाई ने कहा कि अगर ईरान की मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता है तो उनका देश निर्णायक युद्ध के लिए भी तैयार है।
युद्ध रोकने से लेकर जमे धन को जारी करने तक की मांग
ईरानी पक्ष की ओर से बताई गई शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, विदेशों में जमा ईरानी धन को जारी करना और नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। रेजाई ने सोशल मीडिया पर भी सात शर्तों का जिक्र करते हुए कहा कि तेहरान ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में सभी सात शर्तों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए बाकी मांगों को लेकर अलग-अलग दावों को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचा संदेश
ईरानी अधिकारी के अनुसार, कतर इस समय तेहरान और वाशिंगटन के बीच संपर्क स्थापित करने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कतर ने ईरान की शर्तें अमेरिकी पक्ष तक पहुंचा दी हैं। इसके बाद ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। कतर और पाकिस्तान इससे पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत और युद्धविराम की कोशिशों में भूमिका निभा चुके हैं।
‘कोड 100’ को लेकर क्या है जानकारी?
इस बीच सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में ईरान की सैन्य तैयारियों को ‘कोड 100’ से जोड़ा जा रहा है। हालांकि इस समय इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। उपलब्ध रिपोर्ट में रेजाई ने मुख्य रूप से बातचीत की शर्तों और संभावित निर्णायक युद्ध के लिए ईरान की तैयारी की बात कही है। इसलिए ‘कोड 100’ को ईरान की आधिकारिक सर्वोच्च सैन्य चेतावनी या किसी निश्चित ऑपरेशन का नाम बताना फिलहाल पुष्टि से परे होगा।
बातचीत या फिर बढ़ेगा टकराव?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फरवरी 2026 के अंत में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद और बढ़ा था। इसके बाद युद्धविराम और बातचीत की कई कोशिशें हुईं। अप्रैल में दोनों पक्षों के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की व्यवस्था भी शामिल थी। अब एक बार फिर मध्यस्थ देशों के जरिए बातचीत बहाल कराने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिकी प्रतिक्रिया और ईरान की सात शर्तों पर होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।