अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब खेल की दुनिया पर भी दिखाई देने लगा है। अगले साल होने वाले फुटबॉल वर्ल्ड कप को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यह टूर्नामेंट अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में खेला जाना है और इसमें इस बार 48 टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें ईरान की टीम भी शामिल है। लेकिन हाल के हमलों और बढ़ते तनाव के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या ईरान की टीम इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले पाएगी या नहीं।
अमेरिका में ही खेलने हैं ईरान के मैच
फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत जून में होगी और इसमें ईरान की टीम को ग्रुप चरण में अमेरिका में ही अपने मुकाबले खेलने हैं। ईरान को अपने ग्रुप में न्यूजीलैंड, बेल्जियम और मिस्र की टीमों के साथ रखा गया है। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईरान के खेल अधिकारियों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में खिलाड़ियों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल है और ऐसे माहौल में टीम को अमेरिका भेजना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान से बढ़ा विवाद
इस पूरे मामले ने तब और ज्यादा तूल पकड़ लिया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान सामने आया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर ईरान की फुटबॉल टीम को लेकर टिप्पणी की। उनके बयान में कहा गया कि टीम का वर्ल्ड कप में स्वागत है, लेकिन उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि उनकी सुरक्षा कितनी जरूरी है। इस बयान को कई लोगों ने चेतावनी या धमकी की तरह देखा, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।
ईरान टीम ने दिया सख्त जवाब
ट्रंप के बयान के बाद ईरान की फुटबॉल टीम ने भी प्रतिक्रिया दी। टीम की ओर से कहा गया कि वर्ल्ड कप किसी एक देश का नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा आयोजित टूर्नामेंट है। उन्होंने साफ कहा कि टीम ने अपनी मेहनत और प्रदर्शन के दम पर वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया है और कोई भी उन्हें इसमें खेलने से नहीं रोक सकता। ईरान की तरफ से यह भी कहा गया कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना मेजबान देशों की जिम्मेदारी होती है।
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फुटबॉल संस्था पर भी बढ़ा दबाव
इस विवाद के बीच अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अगर वैश्विक संघर्ष का असर खेल पर पड़ रहा है तो इस मामले पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। कई आवाजें यह भी उठा रही हैं कि मेजबानी को लेकर दोबारा विचार किया जाए या सभी टीमों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट योजना बनाई जाए।
खेल और राजनीति के टकराव की नई मिसाल
यह पूरा मामला एक बार फिर दिखाता है कि खेल और राजनीति कई बार एक-दूसरे से अलग नहीं रह पाते। फुटबॉल वर्ल्ड कप दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात ने इस टूर्नामेंट को भी विवादों में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान की टीम वर्ल्ड कप में हिस्सा ले पाएगी या फिर वैश्विक तनाव का असर इस बड़े टूर्नामेंट पर भी पड़ेगा।