ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत तक साफ दिखाई देने लगा है। सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। मौजूदा हालात में पेट्रोल और डीजल की बिक्री कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बन चुकी है, जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
प्रति लीटर भारी नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल पर करीब 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यही वजह है कि कंपनियों का घाटा तेजी से बढ़ रहा है और स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है।
कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव
पिछले कुछ वर्षों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। 2026 की शुरुआत में यह गिरकर करीब 70 डॉलर तक आईं, लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण फिर से कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी हुई हैं। इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों पर पड़ रहा है।
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रोजाना 1600 करोड़ का घाटा
आंकड़ों के अनुसार, पहले यह नुकसान करीब 2400 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया था। हालांकि अब यह घटकर लगभग 1600 करोड़ रुपये रोजाना रह गया है। इस कमी के पीछे सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला अहम माना जा रहा है, जिससे कंपनियों को कुछ राहत मिली है।
चुनाव के बाद बढ़ सकती हैं कीमतें
मैक्वेरी ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल सरकार ने कीमतों को स्थिर रखा है, लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक बरकरार रहना मुश्किल दिख रहा है।
आम जनता पर असर तय
अगर कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी, जिससे रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। ऐसे में आने वाले समय में महंगाई बढ़ने की आशंका साफ दिखाई दे रही है।
आगे की स्थिति पर नजर
तेल बाजार में जारी अनिश्चितता और वैश्विक तनाव के बीच अब सबकी नजर सरकार और कंपनियों के अगले कदम पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि कीमतों को कैसे संतुलित किया जाता है और आम जनता को राहत देने के लिए क्या फैसले लिए जाते हैं।